बंद चीनी मिलों में खुलेंगे उद्योग

सत्यव्रत मिश्रा | पटना Jan 28, 2018 09:51 PM IST

बिहार सरकार की तैयारी

बिहार सरकार ने अपनी बंद पड़ी चीनी मिलों को औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। इस कदम से इन मिलों को अपना बकाया को खत्म करने में मदद मिलेगी, वहीं जमीन की किल्लत झेल रहे उद्यमियों को भी सहूलियत होगी। इस वक्त राज्य सरकार की सात चीनी मिलें बंद हैं। इन मिलों को राज्य सरकार ने 2008 से लेकर 2015 तक लंबी अवधि के पट्टे पर देने की कोशिश की लेकिन छोटे आकार की वजह से किसी ने भी इनमें रुचि नहीं दिखाई। इस वजह से इन मिलों को राज्य सरकार ने औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है।

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, 'राज्य में औद्योगिक जमीन की काफी जरूरत है। ऐसे में करीब 20 से 25 साल से बंद चीनी मिलों की जमीन को हमने उद्योगों को देने का फैसला किया है। इससे बिहार के औद्योगिक विकास को रफ्तार मिलेगी।'

राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक इस कदम से दो फायदे होंगे। गन्ना विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'ये चीनी मिलें लंबे समय तक घाटे में चलीं और इन पर करोड़ों रुपये का बकाया है। इस पूरी रकम का भुगतान करना होगा। इन मिलों के पास अच्छी खासी जमीन है, जिसे अगर बेचा जाए तो मोटी रकम मिल सकती है। इससे कर्मचारियों, गन्ना किसानों और दूसरे बकाये का भुगतान किया जा सकेगा। इसके साथ ही उद्योगों की जरूरत भी पूरी जा सकेगी। यह दोनों पक्षों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा।' राज्य सरकार इन्हें बिहार औद्योगिक भूमि प्राधिकार (बियाडा) के हवाले करने की तैयारी में है, जो इन्हें टुकड़ों-टुकड़ों में उद्यमियों को देगी। बिहार सरकार ने 2008 में अपनी बंद पड़ी 15 चीनी मिलों को निजी निवेशकों को लंबी अवधि के पट्टे पर सौंपने का फैसला किया था। इसके तहत 8 चीनी मिलों को पट्टे पर दिया गया लेकिन बाकी मिलें बंद पड़ी हैं।
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