महाराष्ट्र में तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरण

सुशील मिश्र | मुंबई Jan 31, 2018 09:53 PM IST

केंद्र और राज्य की सत्ता में सहयोगी शिवसेना के अलग चुनाव लडऩे की घोषणा के बाद से महाराष्ट्र में तेजी से राजनीतिक समीकरण बदलना शुरु हो गए हैं। कांग्रेस और एनसीपी शिवसेना को अपने खेमे में लाने की फिराक में है तो भाजपा 2019 के चुनाव में दोबारा सत्त्ता में आने का दंभ भर रही है। वहीं शिवसेना स्वबल पर चुनाव लडऩे की बात कह रही है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हो लेकिन राजनीति के पुराने खिलाड़ी अभी से राजनीतिक बिसात में अपनी गोट बिठाने में लग चुके हैं।
 
शिवसेना द्वारा 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव स्वबल पर लडऩे की घोषणा किये जाने के बाद से तमाम चर्चाएं शुरु हो गई। कांग्रेस जैसे दल भी शिवसेना को अपने साथ लाने की फिराक में लगे हुए हुए हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेसी नेता पृथ्वीराज चव्हाण शिवसेना से गठजोड़ के संकेत देते हुए कहते हैं कि शिवसेना अगर भाजपा विरोधी दलों के साथ आना चाहती है तो पार्टी को पहले राजग से नाता तोड़ कर सत्ता से हटना होगा। आज शिवसेना भाजपा के साथ सत्ता में है और अगर यह अलग होकर भाजपा विरोधी दलों के साथ आना चाहती है तो हमलोग इस पर विचार करेंगे और (गठबंधन के लिए) एक प्रस्ताव दिल्ली भेजा जा सकता है। कांग्रेसी नेताओं की मानी जाए तो भाजपा को सत्त्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस ने सारे विकल्प खोल रखे हैं।
 
महाराष्ट्र के दिग्गज नेता व एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार इस समय गैर भाजपा गठबंधन बनाने के लिए प्रयासरत है साथ ही वह इस बात से आश्वस्त भी है कि शिवसेना-भाजपा एक साथ चुनाव नहीं लड़ेंगे। पवार को लग रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता तेजी से कम हो रही है जिसका वह फायदा उठा सकते हैं। पवार के करीबियोंं की मानी जाए तो शहरी इलाके में भाजपा अभी भी मजबूत है लेकिन ग्रामीण इलाके से इसके पैर उखडऩे लगे हैं ऐसे में शिवसेना उनके साथ आ जाती है तो महाराष्ट्र में भाजपा की हार तय हैं। शरद पवार की मातोश्री में अच्छी पहुंच है और ये ठाकरे परिवार के करीबी नेताओं में से एक हैं। ऐसे में एनसीपी नेताओं को लग रहा है कि पवार साहेब शिवसेना को साथ ला सकते हैं। 
 
सत्त्ता में बैठी भाजपा को लग रहा है कि वह 2019 में भी सत्ता में आने वाली है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस स्पष्ट कर चुके हैं कि 2019 में जीत भाजपा की ही होने वाली है। शिवसेना गठबंधन के बारे में फिलहाल वह कुछ खुलकर नहीं बोलते हैं उनका कहना है कि शिवसेना कई तरह के बयान देती रहती है फिलहाल वह हमारे साथ सरकार में हैं। हालांकि भाजपा के दूसरे नेता शिवसेना का खुला विरोध करना शुरु कर चुके हैं और वह अकेले चुनाव लडऩे की तैयारी में जुट भी गए हैं। लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का एनसीपी से प्यार सबको पता है। 
 
शिवसेना के स्वबल पर चुनाव लडऩे के बयान के बाद राज्य में राजनीतिक चर्चा गरम है। जिस पर शिवसेना संगठक विनय शुक्ला कहते हैं कि शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उद्धव साहेब ने साफ तौर पर स्वबल पर चुनाव लडऩे ऐलान किया है। स्वबल शब्द का सामान्य और सीधा अर्थ होता है अपने दम पर लडऩा। हम किसी के साथ नहीं बल्कि अपने दम पर चुनाव लडऩे की तैयारी में हैं। जनता का फैसाल जो भी होगा वह सर माथे पर होगा। रही बात कांग्रेस से गठबंधन की तो इसका तो सवाल ही नहीं उठता है फिर भी खायली पुलाव पकाने के लिए किसी को मनाही नहीं है। 
 
फिलहाल शिवसेना महाराष्ट्र और केन्द्र की सरकार में सहयोगी है। पिछला विधानसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग अलग लड़ा था जबकि लोकसभा चुनाव मिलकर लड़े थे। इस समय महाराष्ट्र विधानसभा में सबसे ज्यादा भाजपा के 122 विधायक है जबकि शिवसेना 63 विधायक है। इसके अलावा कांग्रेस के 42, राकांप के 41 और एआईएमआईएम के दो विधायक है। महाराष्ट्र को 48 लोकसभा सदस्यों में से सबसे ज्यादा भाजपा के 23, शिवसेना के 18, कांग्रेस के दो, एनसीपी के चार और स्वाभिमानी पार्टी के एक सांसद हैं। 
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