अब व्यापार के लिए भी एकल खिड़की!

बीएस संवाददाता | पटना Feb 04, 2018 09:44 PM IST

बिहार सरकार अब व्यापारियों के लिए भी सिंगल विंडो व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है। इस व्यवस्था से कारोबारी सभी प्रकार के लाइसेंस, प्रमाण पत्र और जरूरी कागजात हासिल कर सकेंगे। अभी राज्य में सिर्फ  उद्योगों के लिए यह व्यवस्था है। राज्य सरकार के मुताबिक इस नई व्यवस्था से कारोबारियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। राज्य के उप-मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने रविवार को इस बाबत संकेत दिए। राज्य के इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी संघ की वार्षिक बैठक में मोदी ने कहा कि राज्य सरकार पूरे मन से व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने में लगी हुई है। 
 
उन्होंने कहा, 'इसी व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए वस्तु एवं सेवा कर की शुरुआत हुई, जिससे पूरा देश अब एक कर  के दायरे में आ गया है। उद्योगों की सुविधा के लिए हमने राज्य में सिंगल विंडो व्यवस्था की शुरुआत की है, जिससे सरकार से जुड़ी उनकी सभी जरूरतें एक निश्चित समय सीमा में पूरी रही हैं। अब हम व्यापारियों के लिए भी ऐसा कुछ करने की सोच रहे है। उनके लिए भी अब सिंगल विंडो व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के जरिए व्यावसायियों को कारोबार शुरू करने का लाइसेंस, प्रमाण पत्र और दस्तावेज मुहैया करवाए जा सकेंगे। इस बाबत में राज्य सरकार विचार कर रही है और जल्दी ही फैसला करेगी।
 
दूसरी तरफ , उन्होंने कारोबारियों से समय पर आयकर, जीएसटी और सभी तरह के करों पूरा भुगतान करने की भी अपील की। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में वेतनभोगियों ने औसत प्रति व्यक्ति75 हजार रुपये आयकर का भुगतान किया, जबकि व्यवसाय व विभिन्न पेशों से जुड़े लोग औसत प्रति व्यक्ति मात्र 25,753 रुपये का ही आयकर अदा किया है। मोदी ने व्यावसायियों को चेताया कि पूरी कर व्यवस्था अब सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित है, जिसके कारण अब करवंचना करना मुश्किल है।
 
कृषि को 70,000 करोड़ की दरकार! 
 
बिहार में अगले वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र को कर्ज के रूप में 70,000 करोड़ रुपये की दरकार होगी। राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के मुताबिक किसानों की आय दोगुनी करने के वास्ते भी बैंकों को बिहार में कृषि से संबंधित क्षेत्रों और लघु व छोटे उद्योगों पर भी मोटा निवेश करना होगा। नाबार्ड ने बिहार में अगले वित्त वर्ष के लिए कर्ज लेने की क्षमता का आकलन लगाया है। इसकेमुताबिक राज्य में नए वित्त वर्ष में प्राथमिकता वाले क्षेत्र में 1.22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज लेने की क्षमता है। बैंक के मुख्य महाप्रबंधक (बिहार-झारखंड) एस के मजूमदार ने बताया कि यह पिछले साल के मुकाबले 6.17 प्रतिशत अधिक है। यह 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि के सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए लगाया गया है। 
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