केजरीवाल सरकार रोजगार देने में फिसड्डी

रामवीर सिंह गुर्जर | नई दिल्ली Feb 13, 2018 09:30 PM IST

... वादा तेरा वादा

► पांच साल में 8 लाख रोजगार सृजन का था वादा, तीन साल में देने थे 4.8 लाख रोजगार
निजी क्षेत्रों में रोजगार मेलों से 20-25 हजार रोजगार ही दिला पाई सरकार
केंद्र व राज्य के बीच टकराव से खाली पड़े सरकारी पद भरने में भी केजरीवाल नाकाम

बुधवार को तीन साल पूरे करने जा रही दिल्ली की केजरीवाल सरकार रोजगार का वादा पूरा करने में नाकाम रही है। आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्ता में आने पर अगले पांच साल के दौरान 8 लाख रोजगार सृजन की बात कही थी, लेकिन अब कार्यकाल का 3 साल पूरा होने के बाद भी वह यह वादा पूरा करने के इर्द-गिर्द भी नजर नहीं आ रही है। सरकार चंद हजार लोगों को ही रोजगार दे पाई है। पांच साल में 8 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य पूरा करने के लिए राज्य सरकार को हर साल करीब 1.6 लाख रोजगार देने थे। इस तरह, तीन साल में 4.8 लाख लोगों को रोजगार मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने केजरीवाल सरकार के तीन साल के कार्यकाल के दौरान रोजगार के आंकड़े खंगालने के लिए दिल्ली सरकार के रोजगार व श्रम मंत्री गोपाल राय को ई-मेल किया, लेकिन जवाब में कोई आंकड़े नहीं बताए। दिल्ली सरकार ने तीन साल में निजी क्षेत्र में लोगों को रोजगार दिलाने के लिए रोजगार मेले का आयोजन करने की पहल की। इनके जरिये करीब 20-25 हजार लोगों को रोजगार दिया गया। कुल मिलाकर राज्य सरकार चुनावी वादे के मुताबिक तीन साल में 4.8 लाख रोजगार देने के लक्ष्य का महज 5 फीसदी ही पूरा कर पाई। 

दिल्ली सरकार तीन साल में खाली पड़े करीब 36,000 सरकारी पद भरने में भी असफल रही है। दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल के बीच टकराव के कारण ये पद रिक्त हैं। दिल्ली सांख्यिकीय पुस्तिका, 2017 के अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में पंजीकृत 8,968 कारखानों में रोजगार में लगे कर्मचारियों की संख्या 4,16,927 थी। इसी तरह, वर्ष 2015 में पंजीकृत 8,954 क ारखानों में रोजगार में लगे कर्मचारियों की संख्या 4,15,278 थी। 2016 में पंजीकृत 8,968 कारखानों में 4,16,833 कर्मचारी काम कर रहे थे। 
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