छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के आतंक से 95 गांवों में अंधेरा

आर कृष्णा दास | रायपुर Mar 01, 2018 10:09 PM IST

छत्तीसगढ़ में नक्सली आतंक की वजह से 95 गांवों में बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया अब असंभव लगती है। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य योजना) के तहत छत्तीसगढ़ में 8,38,189 घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया था। केंद्र सरकार को इसके लिए 838 करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव दिया गया था। इस परियोजना पर काम शुरू हो चुका है लेकिन छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित 95 गांवों ने विद्युतीकरण योजना के लिए एक गंभीर चुनौती पेश की है। अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि इस क्षेत्र के गांवों में बिजली पहुंचाने का काम असंभव साबित हुआ क्योंकि विद्रोहियों ने यहा दावा किया कि यह उनका 'स्वतंत्र क्षेत्र' है। 

 
राष्ट्रीय ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (एनआरईसी) और छत्तीसगढ़ की सरकार के बीच बिजली योजना की कार्य समीक्षा के लिए हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह मुद्दा उठाया गया। ये गांव बस्तर के चार जिलों में मौजूद हैं और ये इलाके दुनिया भर में नक्सली हिस्सा के लिए कुख्यात हैं। इन 95 गांवों में से 67 गांव सुकमा में, 23 गांव बीजापुर जिले में, 4 दंतेवाडा जिले में और एक गांव नारायणपुर में मौजूदा है और इन गांवों से ग्रिड नहीं जुड़ सका है। सुकमा जिला फिलहाल नक्सली हिंसा का प्रमुख केंद्र है। छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक अंकित आनंद ने बैठक में यह बताया कि गठिन भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सली आतंक की वजह से 95 गांवों में विद्युतीकरण संभव नहीं है। राज्य सरकार इन गांवों में रोशनी पहुंचाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा संसाधन की योजना पर काम कर रही है। आनंद का कहना है कि इस योजना के तहत राज्य सरकार 95 गांवों के निवासियों को 200 किलोवॉट सोलर होम लाइट का वितरण करने पर विचार कर रही है। इसके जरिये तीन एलईडी लैंप चार्ज किया जा सकता है, एक टीवी चलाया जा सकता है और मोबाइल भी चार्ज हो सकता है।
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