निवेशक चाहते हैं कि वादा पूरा करे सरकार

साहिल मक्कड़ |  Mar 06, 2018 11:34 PM IST

उत्तर प्रदेश निवेशक सम्मेलन

हाल में आयोजित उत्तर प्रदेश निवेशक सम्मेलन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी सहित उद्योग जगत की जानी मानी हस्तियों ने कार्यकाल के पहले 11 महीनों में कानून व्यवस्था की स्थिति सुधारने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की। मुख्यमंत्री ने 4.28 लाख करोड़ रुपये के सभी 1,045 निवेश प्रस्तावों की खुद निगरानी करने का वादा किया जिसकी सभी ने प्रशंसा की। संभवत: यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री की अगुआई में 18 कैबिनेट मंत्रियों ने किसी राज्य के निवेशक सम्मेलन में शिरकत की। इनमें से कई मंत्री राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों के थे।

निवेशकों के लिए संदेश साफ था कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें निवेश प्रस्तावों को पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। मोदी ने सम्मेलन के पहले दिन 21 फरवरी को निवेशकों से कहा, 'लालफीताशाही नहीं बल्कि लाल कालीन निवेशकों का स्वागत करेगा।' अंतिम दिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि निवेशक ऐसे राज्य में निवेश करना चाहते हैं जो भ्रष्टाचार मुक्त हो और जहां कानून व्यवस्था की अच्छी स्थिति हो।

पिछले 11 महीनों में योगी सरकार ने इस मामले में अपनी क्षमता को साबित किया है। निवेशक सम्मेलन से भाजपा के कार्यकर्ताओं में यह संदेश भी गया कि योगी को मोदी और शाह का पूरा समर्थन प्राप्त है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि योगी के साथ खड़े रहने में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का फायदा है क्योंकि उन्हें भविष्य में मोदी के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

योगी के करीबी होने का दावा करने वाले भाजपा के एक नेता ने कहा, 'उत्तर प्रदेश में मोदी के बाद योगी सबसे लोकप्रिय नेता हैं। अगले लोक सभा चुनावों में पिछले प्रदर्शन को दोहराने के लिए भाजपा को उनकी जरूरत है, खासकर तब जब दूसरी जगह पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। योगी भी पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। पार्टी में उनके कई प्रतिद्वंद्वी हैं जिनमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हैं।'

पार्टी नेतृत्व योगी सरकार के कामकाज पर करीबी नजर रख रहा है। मोदी सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी वापस उत्तर प्रदेश जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और वहां लोक सभा की सर्वाधिक 80 सीटें हैं। मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशक सम्मेलन के दौरान आए निवेश प्रस्तावों को लागू करने की है। अखिलेश यादव और मायावती के जमाने में आए निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। यही वजह है कि निवेशक अब भी राज्य में निवेश करने को लेकर आशंकित हैं।
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