उप्र में आवारा जानवरों पर लगेगी लगाम

बीएस संवाददाता | लखनऊ Mar 28, 2018 09:50 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले आवारा जानवरों को लेकर सजग हो गई है। 'अन्ना प्रथा' के तहत स्वतंत्र छोड़े गए पालतु जानवरों से बुंदेलखंड के किसानों को हो रहे नुकसान को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश सरकार बुंदेलखंड के हर गांव में पशु आश्रय स्थल बनाएगी, जहां आवारा पशु रखे जाएंगे और उनकी देखभाल होगी। पहले प्रदेश सरकार ने जिला स्तर व नगर निकायों के स्तर पर पशु आश्रय स्थल बनाने का ऐलान किया था। नए फैसले के तहत अब बुंदेलखंड में ग्राम पंचायत स्तर  पर जिलाधिकारियों के माध्यम से पशु आश्रय स्थलों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने पिछले बजट में आश्रय स्थलों के लिए आवंटित 10 करोड़ रुपये धनराशि पुर्नविनियोजित करने का भी निर्णय लिया है। अब यह धनराशि ग्राम पंचायतों को दी जाएगी। पहले चरण में जिलाधिकारी अपने जिले के हर ब्लॉक के एक-एक न्याय पंचायत में पशु आश्रय स्थल का निर्माण कराएंगे। इसके लिए ग्राम पंचायतों को 30 लाख रुपये दिए जाएंगे, जबकि बाकी धन राशि की व्यवस्था पंचायतें अपनी निधि, मनरेगा, सांसद व विधायक निधि, वित्त आयोग से मिलने वाली रकम से करेंगी। निर्माण कार्य ग्राम समाज की जमीन पर किया जाएगा और इसका संचालन पंचायतें खुद करेंगी।
 
राज्य मंत्रिमंडल में पारित प्रस्ताव के मुताबिक फिलहाल पिछले वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में आवंटित 10 करोड़ रुपये इस मद में इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि आगे के लिए और भी धन की व्यवस्था की जाएगी। प्रस्ताव में सरकार ने माना है कि बुंदेलखंड में करीब 7 लाख आवारा जानवर फसलों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा रहे हैं। बुंदेलखंड में चल रही अन्ना प्रथा के तहत किसान व गांव वाले चारे-पानी के अभाव में अपने पालतू जानवरों को खुला छोड़ देते हैं। बुंदेलखंड में अन्ना जानवर पिछले तीन साल के फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। आवारा जानवरों से फसलों को हुए नुकसान के चलते कई किसानों ने आत्महत्या तक कर ली है। 
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