अब मोबाइल ऐप भी मिलेंगे 'कड़कनाथ'

एजेंसियां | भोपाल Mar 28, 2018 09:51 PM IST

अपने विशेष स्वाद और औषधीय गुणों के लिए मशहूर मुर्गे की दुर्लभ नस्ल 'कड़कनाथ' अब मोबाइल ऐप्लीकेशन पर भी उपलब्ध हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने कड़कनाथ से जुड़ी जानकारियां लोगों तक पहुंचाने के लिए एक मोबाइल ऐप्लीकेशन (ऐप) शुरू किया है। कड़कनाथ का मांस अपने पोषक तत्वों के लिए मशहूर हैं और इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। इस ऐप का नाम 'एमपी कड़कनाथ' रखा गया है। यह ऐप बनाने का मकसद कड़कनाथ बेचने वाले मुर्गीपालकों को देश के दूसरे हिस्से के लोगों से जोडऩा है। इस बारे में राज्य के सहकारी मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, 'इस मोबाइल ऐप के जरिये लोग कहीं से भी कड़कनाथ का ऑर्डर दे सकते हैं। सहकारी समितियों के पास इनकी उपलब्धता का पता भी इस ऐप से लगाया जा सकता है।'
 
सारंग ने कहा कि ऐप के जरिये झाबुआ और अलीराजपुर की 21 समितियों के 430 सदस्यों को कड़कनाथ बेचने के लिए मंच मुहैया कराया जाएगा। दूसरी समितियां भी इसके साथ जोड़ी जा रही हैं। मंत्री ने कहा कि कड़कनाथ अपने पोषक तत्वों और अनूठे स्वाद के लिए मशहूर है, खासकर इसके मांस में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। सारंग ने कहा, 'दूसरी नस्लों के मुर्गों के मुकाबले कड़कनाथ में प्रोटीन की मात्रा 25-27 प्रतिशत तक होती है। दूसरी नस्लों में प्रोटीन की मात्रा 18 प्रतिशत तक ही होती है। कड़कनाथ लौह तत्व की मात्रा के लिए भी जाना जाता है। दूसरे मुर्गों की तुलना में कोलेस्ट्रॉल और वसा की मात्रा भी कम होती है।' राज्य सहकारी विभाग ने यह ऐप तैयार किया है और गूगल प्ले स्टोर पर यह उपलब्ध हो गया है। हाल में ही कड़कनाथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद का विषय बन गया था, क्योंकि दोनों ही राज्यों का दावा था कि यह नस्ल उन्हीं के यहां अस्तित्व में आई है। दोनों राज्यों ने कड़कनाथ के लिए 'जीआई टैग' हासिल करने के मकसद से चेन्नई में 'ज्योगरफीकल इंडिकेशन रजिस्ट्री' के लिए आवदेन सौंपे थे। मध्य प्रदेश को उम्मीद है कि जीआई टैग उसे ही मिलेगा।  
 
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