सीएजी का सवाल, कहां गए बिहार के 5,000 करोड़ रुपये?

सत्यव्रत मिश्रा | पटना Apr 02, 2018 09:31 PM IST

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने बिहार सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सीएजी के मुताबिक राज्य सरकार करीब 5,000 करोड़ रुपये का कोई हिसाब-किताब नहीं दे पा रही हैं, वहीं सरकारी विभाग मार्च के महीने में खुले हाथों से पैसे खर्च कर रहे हैं।  वित्त वर्ष 2016-17 में राज्य के बही-खातों के बारे में सीएजी की रिपोर्ट सोमवार को बिहार विधानमंडल में पेश की गई। इस रिपोर्ट में सीएजी ने राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए। इस रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार के संदेही खातों (सस्पेंस अकाउंट्स) में रकम बढ़ती जा रही है। दरअसल, जिस रकम का कोई अता-पता नहीं चलता है, उनकी जानकारी इन खातों में डाल दी जाती है। सीएजी के मुताबिक 2012-13 राज्य सरकार के इन खातों में 1,740 करोड़ रुपये थे, जबकि 2016-17 में यह रकम बढ़कर 4,959 करोड़ रुपये हो गई थी। 

 
इसमें लगातार इजाफा ही हुआ है। 2013-14 में जहां यह रकम 1,785 करोड़ रुपये थी, वहीं 2014-15 में यह दोगुनी होकर करीब 3,500 करोड़ रुपये हो गई। 2015-16 में यह राशि बढ़कर 4,064 करोड़ रुपये हो गई थी। हालांकि, अधिकारी सीधे-सीधे इसे घोटाला कहने से बच रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'जरूरी नहीं है कि यह घोटाला हो। इस रकम के बारे में राज्य सरकार को जानकारी नहीं है। हो सकता है कि किसी मद में पैसे खर्च किए गए हों, लेकिन बिल नहीं जारी किया गया हो। इस वजह से सरकार के पास इसकी जानकारी नहीं है। इसका मतलब है कि सरकार को अपना वित्तीय प्रबंधन सुधारना होगा।' दूसरी तरफ, सीएजी ने बिहार में मार्च लूट की तरफ भी सीधा इशारा किया। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 11 विभागों ने अपने कुल बजट आवंटन का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा सिर्फ मार्च के महीने में खर्च किया। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में बड़े खर्च वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करते हैं। 
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