निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए विधेयक

बीएस संवाददाता | लखनऊ Apr 03, 2018 09:24 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर रोक लगाने के लिए विधेयक लाने का फैसला किया है। नए सत्र से लागू होने वाले इस विधेयक में स्कूलों की ओर से विभिन्न मदों में लिए जाने वाले शुल्क पर लगाम लगाई जाएगी, साथ ही स्कूलों को अपने सभी खर्च भी सार्वजनिक करने होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार देर शाम हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में शुल्क निर्धारण विधेयक का प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने बताया कि निजी स्कूलों में मनमानी फीस को लेकर नियमावली बना दी गई है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सालाना 20,000 रुपये या इससे अधिक शुल्क वसूलने वाले निजी, अल्पसंख्यक सहित, विद्यालयों के लिए लागू होगा। 
 
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित विध्याल शुल्क निर्धारण का विधेयक मंजूर कर दिया है। अब निजी स्कूल संभावित शुल्क में वाषिक शुल्क, पंजीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क व विवरण पुस्तिका की कीमत ही ले सकेंगे। जबकि बस सुविधा, बोर्डिंग, मेस चार्ज, शैक्षिक भ्रमण आदि वैकल्पिक शुल्क में शामिल किए जाएंगे। वैकल्पिक शुल्क जबरन नहीं लिया जा सकेगा। सभी स्कूलों को सत्र की शुरुआत के 60 दिन पहले ही सभी खर्च अपनी वेबसाइट पर दिखाने होंगे। निजी स्कूल केवल त्रैमासिक व अर्धवार्षिक शुल्क ही ले सकेंगे। साल भी की फीस एक साथ लेने पर पाबंदी लगा दी गई है। 
 
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि निजी स्कूल अपने छात्रों को किसी स्थान विशेष से स्टेशनरी या अन्य शैक्षिक सामाग्री खरीदने के लिए बाध्य नही कर सकेंगे। निजी स्कूलों के छात्र किसी भी दुकान से जूते, मोजे, बैग व यूनिफार्म खरीद सकेंगे। इसके अलावा निजी स्कूल पांच साल के पहले स्कूल यूनिफार्म नही बदल सकेंगे।  शर्मा ने कहा कि विधेयक में शुल्क लिए जाने के मद तय कर दिए गए हैं और केवल उन्हीं मदों में शुल्क लिया जा सकेगा। साथ ही विद्यालय परिसर के अन्य उपयोग से होने वाली आय को भी प्रबंधन को दिखाना होगा।
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