राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद बदले संत के सुर

भाषा | इंदौर Apr 04, 2018 09:44 PM IST

मध्य प्रदेश में चुनावी साल में जिन पांच लोगों को नर्मदा नदी की रक्षा के लिए राज्य मंत्री के दर्जे से नवाजा गया है, उनमें शामिल एक संत समेत दो लोगों ने सूबे की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रस्तावित नर्मदा घोटाला रथ यात्रा रद्द कर दी है। इन लोगों ने राज्य सरकार पर सीधे सवाल उठाते हुए 1 अप्रैल से नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकालने की घोषणा की थी, लेकिन राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद दोनों ने यह यात्रा रद्द कर दी है।   राज्य सरकार के तीन अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के विभिन्न चिह्नïत क्षेत्रों में विशेषत: नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता का अभियान निरंतर चलाने के लिए 31 मार्च को विशेष समिति गठित की गई है। 
 
इस समिति के पांच विशेष सदस्यों-नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, भैयू महाराज, कम्प्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया गया है। समिति में शामिल इंदौर के कंप्यूटर बाबा की अगुआई में 1 अप्रैल से 15 मई तक प्रदेश के प्रत्येकजिले में नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकालकर इस नदी की बदहाली का मुद्दा उठाने की रूप-रेखा तय की गई थी। इस मुहिम की प्रचार सामग्री सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, जिससे पता चलता है कि यह यात्रा नर्मदा नदी में जारी अवैध रेत खनन पर अंकुश लगाने और इसके तटों पर किए गए पौधारोपण के घोटाले की जांच की प्रमुख मांगों के साथ निकाली जानी थी। राज्य मंत्री का दर्जा हासिल करने के बाद कंप्यूटर बाबा ने कहा कि उन्होंने यह यात्रा निरस्त कर दी है। 
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