बिजली निजीकरण से पीछे हटी योगी सरकार

बीएस संवाददाता | लखनऊ Apr 06, 2018 09:44 PM IST

उत्तर प्रदेश के 5 बड़े शहरों और 7 वितरण मंडलों में बिजली व्यवस्था के निजीकरण के फैसले से पीछे हटने के बाद योगी सरकार ने इसे निवेश लाने की प्रक्रिया करार दिया है। निजीकरण का फैसला वापस ले लिया गया है लेकिन सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार के लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि निजीकरण से जुड़ा कोई प्रस्ताव मंत्रिमंडल ने मंजूर नहीं किया था बल्कि बिजली वितरण में निवेश लाने की बात कही गई थी। भाजपा के स्थापना दिवस पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश और निजीकरण में फर्क होता है। राज्य में कई परिवारों तक आज भी बिजली नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था में सुधार लाने के लिए निवेश किया जा रहा है और निजी निवेश की संभावना से हमारी सरकार पीछे नहीं हटी है।

 
इससे पहले राज्य के 5 बड़े शहरों लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद की बिजली व्यवस्था के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों, इंजीनियरों और उपभोक्ताओं के व्यापक विरोध के बाद योगी सरकार ने यू-टर्न लेते हुए इस फैसले को वापस ले लिया था। बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की कवायद को फिलहाल टाल दिया गया है। राज्य के बिजली कर्मचारियों के आंदोलन के आगे घुटने टेकते हुए सरकार ने गुरुवार देर रात यह कदम उठाया गया।  16 मार्च को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, मुरादाबाद और गोरखपुर की बिजली व्यवस्था फ्रै ंचाइजी को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। साथ ही रायबरेली, जालौन, इटावा, सहारनपुर, कन्नौज और बलिया सहित 7 वितरण मंडलों में एकीकृत सेवा प्रदाताओं की नियुक्ति पर भी मुहर लगाई गई थी। 
कीवर्ड uttar pradesh, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,

  
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