बिजली कर्मचारी जानेंगे उपभोक्ताओं की दिक्कतें

बीएस संवाददाता | लखनऊ Apr 09, 2018 09:58 PM IST

उत्तर प्रदेश में 5 बड़े शहरों और 7 जिलों में बिजली वितरण के निजीकरण का फैसला टलने के बाद अब बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इन शहरों में जाकर उपभोक्ताओं की दिक्कतें जानेंगे। बिजली कर्मचारी व इंजीनियर उपभोक्ताओं को निजीकरण के नुकसान के बारे में भी आगाह करेंगे, साथ ही आपूर्ति की दशा सुधारने में भी जुटेंगे। बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों के दबाव के चलते राज्य सरकार ने फिलहाल निजीकरण का फैसला वापस ले लिया है, लेकिन बिजली कर्मचारियों ने सरकार के इस फैसले को भुनाने की पुरजोर कोशिश शुरू कर दी है। बिजली कर्मचारियों को आभास हो गया है  कि  उनकी जरा सी भी लापरवाही भविष्य में उन पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में अब वे बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए गंभीर हो गए हैं।

 
जिन पांच शहरों की बिजली सरकार ने निजी हाथों में सौंपने का फैसला लिया था, उन्हीं शहरों में अब मंगलवार से संगोष्ठी आयोजित कर उपभोक्ताओं से उनकी समस्याएं जानने की योजना तैयार की गई है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के मुताबिक बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए पांचों शहरों में संगोष्ठी आयोजित कर उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति देने की कार्य योजना तैयार की जाएगी। संयुक्त समिति का कहना है कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन और संघर्ष समिति के बीच गत 5 अप्रैल को हुए समझौते के अनुसार विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लेकर सुधार की कार्रवाई की जाएगी। 
 
समिति के संयोजक शैंलेंद्र दुबे ने कहा कि निजी फ्रैंचाइजी के नाम पर आगरा में चल रही लूट और पावर कॉर्पोरेशन को हो रहे भारी नुकसान के मद्देनजर इन शहरों में समझौते के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार के लिए बिजली कर्मचारी व अभियंता जुटेंगे।
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