महीने भर में आलू के बढ़ गए भाव

सिद्धार्थ कलहंस | लखनऊ Apr 10, 2018 10:40 PM IST

आलू के दामों में आया दम

सरकारी खरीद, एमएसपी की घोषणा और बाहरी राज्यों की मांग बढ़ने से आलू की कीमतों में आई तेजी
यूपी के खुले बाजार में आलू की कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं
एक माह पहले 5 रुपये किलो बिक रहा आलू अब 20 रुपये किलो तक पहुंचा

एक महीने की कवायद के बाद हांफ रहे आलू के दाम अब कुलांचे मारने लगे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने, भंडारण की उचित व्यवस्था, दूसरे राज्यों को निर्यात और सरकारी खरीद के चलते यूपी में खुले बाजार में आलू की कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। आलू की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है तथा बाहरी राज्यों में उत्तर प्रदेश के आलू की मांग भी बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी सहित ज्यादातर शहरों में खुले बाजार में आलू की कीमतें 18 रुपये से लेकर 20 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं जबकि थोक मंडी में यह 14 रुपये किलो बिक रहा है। महज एक महीने पहले तक प्रदेश की मंडियों में आलू की थोक कीमतें 5 से 6 रुपये प्रति किलो थी। आलू की बढ़ी कीमतों का फायदा किसानों को भी मिलने लगा है। उत्तर प्रदेश की आलू पट्टी फिरोजाबाद, इटावा, अलीगढ़, फर्रुखाबाद और कासगंज में किसानों को एक क्विंटल आलू का भाव 800 से 1,200 रुपये मिलने लगा है।

उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश सरकार ने आंध्र प्रदेश, असम जैसे राज्यों तक प्रदेश का आलू पहुंचाने की कोशिश की है जिसका नतीजा सामने आ रहा है। प्रदेश सरकार ने दूसरे राज्यों की मंडियों को बाकायदा पत्र लिखकर यहां से आलू मंगाने की अपील की है। इसके साथ ही भंडारण की समस्या से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए प्रदेश सरकार ने दो दर्जन से ज्यादा बंद पड़े कोल्ड स्टोर को चालू कराया है। कई और सहूलियतें देकर चल रहे कोल्ड स्टोरों को खाली भी कराया गया है। प्रदेश के कोल्ड स्टोर में इस समय पहले के 120 लाख टन के मुकाबले 145 लाख टन आलू भंडारण की क्षमता हो गई है।  

उत्तर प्रदेश में बीते तीन वर्षों से आलू की बंपर पैदावार हो रही है। प्रदेश में पिछले साल 1.55 लाख क्विंटल आलू का उत्पादन हुआ था। उद्यान विभाग का आकलन है कि इस साल उत्पादन करीब 1.65 लाख क्विंटल तक पहुंच सकता है। इससे पहले फरवरी में ही आलू किसानों की बदहाली को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में कृषि मंत्री, वन मंत्री, उद्यान मंत्री आदि की एक समिति गठित की थी।

समिति ने सुझाव देकर आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 546 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने, सरकारी खरीद करने, निर्यात में सब्सिडी देने को कहा था। हालांकि पिछले साल प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद भी योगी सरकार ने एक लाख क्विंटल आलू की सरकारी खरीद करने की घोषणा की थी लेकिन तभी विलंब के कारण महज 12,000 क्विंटल ही आलू खरीदा जा सका था। इस वर्ष योगी सरकार दो लाख टन आलू की सरकारी खरीद कर रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में खरीद केंद्र खोले गए हैं।

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