प्लास्टिक में फंसे बैंकों के 22,000 करोड़

सुशील मिश्र | मुंबई Apr 12, 2018 09:36 PM IST

महाराष्ट्र का प्लास्टिक उद्योग

पर्यावरण को बचाने के लिए महाराष्ट्र में डिस्पॉजेबल प्लास्टिक के उत्पादन और इस्तेमाल पर पाबंदी से उद्योग के साथ बैंक भी बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र के प्लास्टिक उद्योग में बैंकों के करीब 22,000 करोड़ रुपये लगे हैं। इस उद्योग का कहना है कि जब  राज्य सरकार उद्योग बंद करा रही है तो बैंकों की रकम भी सरकार को ही भरनी चाहिए या फिर पूंजी निकालने के लिए उन्हें (उद्योग को) कुछ समय दिया जाना चाहिए। प्लास्टिक पर पाबंदी से राज्य में 3 लाख से ज्यादा लोगों के सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है। पाबंदी से परेशान इस उद्योग ने अब सरकार से हर्जाना भी मांगना शुरू कर दिया है। कारोबारियों ने इस संबंध में न्यायालय में एक याचिका भी दायर की रखी थी, जिस गुरुवार को सुनवाई हुई। हालांकि इस पर फैसला शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया गया।

प्लास्टिक बैग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव नामित पुनमिया के मुताबिक राज्य सरकार ने एकतरफा फैसला लिया है। पुनमिया ने कहा, 'पिछले साल मेक इन इंडिया के तहत हमें प्रोत्साहित किया जा रहा था। इसके बाद जब बैंकों और निवेशकों ने प्लास्टिक उद्योग में निवेश किया तो राज्य सरकार ने पाबंदी थोप दी। अब बैंकों और निवेशकों दोनों की रकम फंस गई है।

एसोसिएशन के लोगों ने सरकार से फंसी पूंजी निकालने के लिए राज्य सरकार से पर्याप्त समय की मांग की है। उनका कहना है कि कंपनियों, उपकरण एवं संयंत्र आदि में लगाई पूंजी वापस पाने के लिए सात साल का समय चाहिए। प्लास्टिक मैन्युफैक्टचरर्स सोशल वेलफेयर एसोसिएशन के जगन्नाथ वी कामत ने कहा कि पाबंदी से 3 से 5 लाख लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है। प्लास्टिक उद्योग की तरफ से उठाए जा रहे सवाल पर पर्यावरण और उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि राज्य में 18 मार्च को प्लास्टिक बंदी की घोषणा की गई, जबकि इसके पहले ही प्लास्टिक उद्योग के जुड़े लोगों को नोटिस भेजकर जानकारी दी जा चुकी थी।

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