इमली से उन्नति की राह पर आदिवासी महिलाएं

बीएस संवाददाता | जगदलपुर Apr 12, 2018 09:37 PM IST

आर्थिक विकास का जरिया बन रही इमली

3 साल पहले शुरू किया कारोबार, अब बैंक वाले दे रहे लोन का प्रस्ताव
इमली का केक तैयार कर अरब देशों में निर्यात करने की तैयारी

नक्सल प्रभावित दरभा ब्लॉक की ककनार पंचायत की महिलाएं इमली को आर्थिक विकास का जरिया बनाकर इससे अच्छी-खासी आमदनी कर रही हैं। तीन साल पहले शुरू किए गए व्यापार से हुए मुनाफे के चलते इनमें बचत करने की भी सोच विकसित हुई है। वे खर्च काटकर मुनाफे का 10 प्रतिशत हिस्सा ग्राम विकास के लिए सुरक्षित रखती हैं। पिछले साल इमली बेचकर समूह को एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी हुई थी और इस साल भी अच्छे-खासे मुनाफे की गुंजाइश है। बैंक में इस समूह का खाता है, जिसका सारा हिसाब-किताब भी समूह की महिलाएं रखती हैं।

माओवाद की आग में झुलस रहे दरभा ब्लॉक की ये महिलाएं मिसाल मानी जा सकती हैं। अध्यक्ष पार्वती बताती हैं कि 4 साल पहले केवल 30 हजार रुपये से शुरुआत हुई थी। हर साल होने वाले मुनाफे का एक हिस्सा बैंक में जमा कर दिया जाता था। व्यापार की समझ इनमें आई तो केवल इमली की खरीद-बिक्री पर निर्भर न रहते हुए इन्होंने गांव के खाली पड़े खेतों को किराये पर लिया और फसल लगाकर इससे मुनाफा कमाया।

दोनों धंधे में हो रहे मुनाफे का 20 प्रतिशत हिस्सा सीधे बैंक में जमा करती हैं और 10 प्रतिशत ग्राम विकास समिति के लिए संचित कर रखती हैं। 20 प्रतिशत मुनाफा सदस्यों में बराबर बांट दिया जाता है और 50 प्रतिशत रकम अगले साल व्यवसाय के लिए सुरक्षित रख देती हैं। एसएचजी की सचिव जमली ने बताया कि जो रकम बैंक में जमा की गई हैं, उससे अगले साल इमली का केक तैयार करने वाली मशीन खरीदी जाएगी। इमली केक का निर्यात अरब देशों में होता है और केक तैयार हो जाने पर फूल इमली की दोगुनी कीमत केक के जरिये मिल सकती है। फिलहाल एसएचजी द्वारा तैयार की जाने वाली फूल इमली जगदलपुर शहर के व्यापारियों अथवा मंडी में बेची जा रही है।

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