प्लास्टिक पर नहीं मिली राहत

बीएस संवाददाता | मुंबई Apr 13, 2018 09:45 PM IST

बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में प्लास्टिक थैलों पर प्रतिबंध के राज्य सरकार के फैसले पर कारोबारियों को राहत देने से मना कर दिया। न्यायालय ने राज्य सरकार को 23 जून तक प्लास्टिक कारोबारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का भी आदेश दिया। राज्य सरकार के फैसले खिलाफ प्लास्टिक कारोबारियों ने न्यायालय में अपील की थी, लेकिन उनकी दलील खारिज कर दी गई। न्यायालय ने कहा कि प्लास्टिक थैलियों पर रोक लगाने के लिए बनी समीति के सामने कारोबारी अपनी बात रख सकते हैं। कारोबारियों का कहना है कि प्लास्टिक पर पाबंदी से 3 लाख लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।  
 
राज्य सरकार ने प्लास्टिक की थैलों, गिलास, कप, प्लास्टिक प्लेट, चम्मच, स्ट्रॉ, थर्मोकॉल और पैट बोतलों आदि के निर्माण, बिक्री, उपभोग, वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है। बहरहाल न्यायालय ने कारोबारियों को इतना आवश्वासन जरूर दिया है कि प्लास्टिक की वस्तुएं रखने पर 23 मार्च से तीन महीने तक  के लिए किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस तरह, कारोबारियों के पास जमा भंडार खत्म करने के लिए 23 जून तक समय है।  न्यायालय में राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि प्लास्टिक उत्पादोंका उपयोग पर्यावरण की दृष्टि से खतरनाक होने के साथ ही इंसान और मवेशी के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। राज्य सरकार ने कहा कि महाराष्ट्र में हर दिन 1200 टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है। न्यायालय ने कहा कि याचिका दायर करने वाले अपनी बात गठित समिति के सामने रख सकते हैं। 
 
प्लास्टिक एसोसिएशनों का पक्ष रखते हुए वकील मिलिंद साठे ने कहा कि प्लास्टिक उत्पादों पर अचानक पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इससे लाखों लोगों का रोजगार छिन जाएगा। साठे ने समिति के इस मामले पर सुनवाई करने तक प्लास्टिक पर प्रतिबंध हटाने की गुहार लगाई, जिसे न्यायालय ने मानने से इनकार कर दिया। 
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