जल संकट पर आगे आए ग्रामीण

भाषा | बीड (महाराष्ट्र) Apr 15, 2018 09:59 PM IST

महाराष्ट्र के  बीड जिले के 15 गांवों से सैकड़ों लोग चिलचिलाती धूप में मराठवाड़ा के गंभीर जल संकट के समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता मयंक गांधी के एनजीओ की ओर से 8 अप्रैल को शुरू किए गए 45 दिवसीय श्रमदान अभियान के तहत यह कवायद की जा रही है। मयंक ने जल संरक्षण के लिए इन गांवों को गोद लिया है।  गांवों के लोग वर्षा जल को सहेज कर रखने के लिए कई उपाय कर रहे हैं, जिनमें गड्ढों की खुदाई करना, तालाब का ढांचा बनाना, चेक डैम बनाना शामिल हैं। विभिन्न औद्योगिक समूह की ओर से वित्त पोषित अर्थ मूवर्स जैसी भारी मशीनें पापनाशी नदी की सहायक नदियों को गहरा और चौड़ा बनाने का काम कर रही हैं जो छह चयनित गांवों से होकर गुजरती हैं। इन 15 गांवों की कुल आबादी 30,590 है। मयंक ने कहा कि उन्होंने जिले के पारली तालुका को इसलिए चुना क्योंकि वहां सिंचाई का स्तर सबसे कम था। 
 
उन्होंने ममदापुर में पत्रकारों को बताया कि यहां सिर्फ 1.72 फीसदी जमीन सिंचित है जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 16.57 फीसदी है और देश में इसका आंकड़ा 40 फीसदी है। मैं इन गांवों में चौतरफा विकास करना चाहता हूं जिसमें जल सुरक्षा, कृषि, शिक्षा, साफ-सफाई और समुदाय निर्माण शामिल है। मयंक ने कहा कि उनकी ओर से 2016 में शुरू की गई ग्लोबल पारली परियोजना उत्प्रेरक के तौर पर काम कर रही है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता डॉ . हरीश चंद्र वांगे और डॉक्टरों की उनकी टीम जल भंडारण के महत्व के बारे में ग्रामीणों में जागरूकता फैला रही है और उन्हें प्रेरित कर रही है। मयंक ने बताया, 'पानी फाउंडेशन ग्रामीणों को तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहा है जबकि बोरोसिल, यूपीएल, एल्केम जैसी कंपनियां हमें अपनी सीएसआर पहलों के जरिए मदद कर रही हैं। इन 15 में से 10 गांवों को सत्यमेव जयते वॉटर कप प्रतिस्पर्धा में भागीदारी के लिए चयनित किया गया है।
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