रत्नागिरि परियोजना पर राजनीति!

सुशील मिश्र | मुंबई Apr 16, 2018 09:47 PM IST

महाराष्ट्र के रत्नागिरि में प्रस्तावित दुनिया की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी में विवाद बढ़ता जा रहा है। सरकार इस प्रोजेक्ट को जरूरी बता रही है तो सरकार की सहयोगी शिवसेना इसका विरोध कर रही है। कांग्रेस-राकांपा भी राजनीतिक मुद्दा बनाने में लगे हैं। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने नाणर परियोजना के मुंबई ऑफिस में तोडफ़ोड़ कर परियोजना का विरोध किया। पिछले सप्ताह सऊदी अरब की तेल उत्पादक कंपनी अरामको ने इस परियोजना की 50 फीसदी हिस्सेदारी पर करार किया है। 
 
रविवार को मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा था कि वह रत्नागिरी के नाणर ऑयल रिफाइनरी परियोजना परियोजना को शुरू नहीं होने देंगे। उनका कहना था कि इससे पर्यावरण को नुकसान होगा और आसपास के लोगों का जीवन दूभर होगा। राज ठाकरे 1 मई से महाराष्ट्र दौरे में निकल रहे हैं। वह अपने कार्यकर्ताओं से इस परियोजना का पुरजोर विरोध करने को कह रहे हैं। शिवसेना इस परियोजना का पहले से ही विरोध कर रही है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का कहना है कि इस परियोजना को शुरू नहीं होने दिया जाएगा। शिवसेना ने बयान जारी करके कहा कि मुख्यमंत्री ने वचन दिया था कि अगर स्थानीय लोगों का विरोध होगा तो परियोजना कोकण में नहीं आने देंगे। इसके बावजूद उसका करार कर सरकार ने धोखा दिया है। शिवसेना ने कहा कि स्थानीय लोगों के विरोध को दरकिनार कर सरकार यह रिफाइनरी नहीं बना सकती है।
 
परियोजना के करार के बाद  भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस, राकांपा सहित सभी दलों के नेता इलाके में पहुंच कर लोगों को इस परियोजना के बारे में अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रिफाइनरी की वजह से रत्नागिरि सहित पूरे कोंकण के पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। हापुस की तरह यहां भी खेतीबाड़ी खत्म हो जाएगी। 
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