रीन्यू पावर पर 11 करोड़ का जुर्माना

श्रेया जय | नई दिल्ली Apr 16, 2018 09:49 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश में 51 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना शुरू करने में 210 से अधिक दिन की देरी करने पर गुरुग्राम की कंपनी रीन्यू पावर पर 11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अलबत्ता न्यायालय ने बिजली खरीद समझौते (पीपीए) को रद्द करने के मध्य प्रदेश सरकार के फैसले को खारिज कर दिया। रीन्यू ने 2015 में बोली प्रक्रिया के जरिये 5.45 रुपये प्रति यूनिट पर इस परियोजना हो हासिल किया था। यह बोली कुल 300 मेगावाट की बिजली परियोजनाओं के लिए आयोजित की गई थी। बाकी परियोजनाओं के लिए कनाडा की सौर कंपनी स्काईपावर ग्लोबल ने बोली जीती। मध्य प्रदेश सरकार स्काईपावर के साथ पीपीए पहले ही रद्द कर चुकी है। 
 
मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) का कहना था कि स्काईपावर और रीन्यू 50 मेगावाट की दो इकाइयों के लिए निर्धारित समय के भीतर जमीन का अधिग्रहण करने में नाकाम रहीं, इसलिए उसके बोर्ड ने 11 अगस्त 2017 को पीपीए रद्द करने के लिए नोटिस जारी कर दिया। रीन्यू ने इसे जबलपुर उच्च न्यायालय में चुनौती दी जिसने एमपीपीएमसीएल के फैसले को खारिज कर दिया। इसके बाद परियोजना शुरू करने की नई तारीख सितंबर 2017 तय की गई। इस बीच रीन्यू ने परियोजना के मौजूदा स्थल पर अतिक्रमण का हवाला देते हुए इसे बदलने की मांग की। कंपनी ने कहा कि परियोजना स्थल में बदलाव और उससे संबंधित कार्य के कारण इसे शुरू करने में देरी हुई है। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपील की। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अपरिहार्य कारणों से परियोजना शुरू होने में देर हुई लेकिन ये कारण अप्रत्याशित घटना के तहत नहीं आते हैं। न्यायालय ने कंपनी को 11 करोड़ 95 लाख 54 हजार 200 रुपये का जुर्माना देने को कहा जो एमपीपीएमसीएल ने उस पर लगाया था।
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