'हॉलमार्क' से दूर बिहार के सराफा कारोबारी

सत्यव्रत मिश्रा | पटना Apr 17, 2018 09:59 PM IST

बिहार में सराफा कारोबारी अक्षय तृतीया के मौके पर सोने और चांदी की भारी खरीदारी की उम्मीद कर रहे है। हालांकि, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की मानें तो राज्य में सोने-चांदी के महज 654 कारोबारी ही 'हॉलमार्क' का इस्तेमाल करते हैं। राज्य के करीब आधे जिलों में तो इक्का-दुक्का जौहरियों ने यह निशान लिया है।   दरअसल, 'हॉलमार्क' का इस्तेमाल आभूषणों में सोने की शुद्धता को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। बीआईएस के पटना कार्यालय के मुताबिक राज्य के 654 आभूषण विक्रेताओं के पास ही 'हॉलमार्क' निशान है। इसमें से भी 579 जौहरियों ने सोने के गहनों के लिए यह लिया है, जबकि बाकी ने चांदी की वस्तुओं के लिए इस निशान को लिया है। बीआईएस, पटना के प्रमुख के सी एस बिष्ट ने बताया, 'दीवाली और अक्षय तृतीया के मौके पर सोने की खरीद बढ़ जाती है। इसीलिए हम इन मौकों पर उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने की खास कोशिश करते हैं। सोने की गुणवत्ता जानने के लिए 'हॉलमार्क' ही सबसे अच्छी कसौटी है। हम राज्य में इसके प्रचार-प्रसार की कोशिश में लगे हुए हैं। हालांकि, हमारी प्रगति थोड़ी धीमी है, लेकिन अब रफ्तार में इजाफा हो रहा है। पिछले साल करीब 110 जौहरियों ने 'हॉलमार्क' का निशान लिया है। हालांकि, अब भी हमें लंबा सफर तय करना है क्योंकि अब भी ज्यादातर सराफा कारोबारियों ने इस निशान को नहीं अपनाया है।'

 

 केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक अब भी आभूषण विक्रेताओं के लिए 'हॉलमार्क' का निशान लेना स्वैच्छिक है। मतलब उन पर इस निशान को लेने की कोई बध्यता नहीं है। इसीलिए अब भी राज्य में सोना-चांदी के ज्यादातर कारोबारियों ने इसे नहीं लिया है। राज्य के आधे से अधिक जिलों में तो इक्का-दुक्का जौहरियों ने इसे अपनाया है।
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