बिजली हर्जाने की राह नहीं आसान

श्रेया जय | नई दिल्ली Apr 20, 2018 10:13 PM IST

दिल्ली सरकार के अघोषित बिजली कटौती पर डिस्कॉम पर जुर्माना लगाने के प्रस्ताव को उप राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है। जुर्माने को मंजूरी देने का सरकार का यह दूसरा प्रयास है। इससे पहले वर्ष 2016 में तत्कालीन उप राज्यपाल जुर्माने के प्रस्ताव का नामंजूर कर दिया था। हालांकि जुर्माने के इस विचार का क्रियान्वयन होना बाकी है, जिसमें नियामकीय बाधाएं आ सकती हैं। मंजूर प्रस्ताव के मुताबिक बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती होने की स्थिति में बिजली कंपनियों को एक घंटे के अंदर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। ऐसा न होने पर पहले दो घंटे की कटौती पर 50 रुपये और इससे अधिक कटौती पर प्रति उपभोक्ता 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से हर्जाना देना होगा। 

दिल्ली सरकार के डिस्कॉम पर जुर्माना लगाने के प्रस्ताव को लागू करने की राह में कानूनी अड़चनें भी हैं। डिस्कॉम पर जुर्माना लगाने की शुरुआत करना कोई नई बात नहीं है, दिल्ली विद्युत नियामक आयोग(डीईआरसीर) के पास दिल्ली बिजली आपूर्ति कोड व प्रदर्शन मानकों के तहत पहले से डिस्कॉम पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। यह विनियमन राष्टï्रीय राजधानी में डिस्कॉम परिचालन के लिए प्रदर्शन व संचालन मानदंडों को परिभाषित करता है और इसके पास पहले से ही अघोषित बिजली कटौती, लोड शेडिंग, तकनीकी दोष और दुर्घटनाओं के कारण डिस्कॉम  को दंडित करने के प्रावधान हैं। दिल्ली सरकार ने नियामक से डिस्कॉम द्वारा बिजली कटौती व चूक पर रोजाना निगाह रखने को कहा है। दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित राशि वही है, जो डीईआरसी ने अपने मसौदे में सुझाई है। 

किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा डिस्कॉम की चूक की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। डिस्कॉम को खुद अपनी चूक गतिविधियों का रिकॉर्ड रखना पड़ता है। अघोषित बिजली कटौती का विवरण आयोग द्वारा सूचित किया जाता है और डिस्कॉम को उसका पालन करना पड़ता है। 
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