महंगे फ्लैटों और भूखंडों के नहीं मिल रहे खरीदार

बीएस संवाददाता | लखनऊ Apr 25, 2018 09:43 PM IST

मंदी के इस दौर में उत्तर प्रदेश में महंगे फ्लैटों और भूखंडों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। लंबे समय से खरीदारों का टोटा झेल रहे निजी डेवलपरों के साथ ही मंदी की आंच अब सरकारी आवासीय संस्थाओं को भी झुलसाने लगी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पहली बार बहुमंजिला आवासीय योजना लाने वाले नगर निगम को भी महंगे फ्लैटों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हमेशा मांग में रहने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण के पास भी रिक्त मकानों की सूची लंबी होती जा रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के पास इस समय 6,000 से ज्यादा महंगे मकान विभिन्न योजनाओं में खाली हैं, जिन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं। 
 
अखिलेश सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना आईटी सिटी (सीजी सिटी) में भूखंडों के भी खरीदारों का टोटा है। इसका कारण इनकी कीमत का ज्यादा होना है। सीजी सिटी में करीब 900 करोड़ रुपये कीमत के भूखंड कई बार नीलामी बुलाने के बाद भी नहीं बिक पाए। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि कानपुर रोड, रायबरेली रोड, प्रियदर्शनी विहार, देवपुर पारा रोड और कुर्सी रोड आवासीय योजनाओं में बनाए गए 35 से 66 लाख रुपये तक की कीमत के फ्लैट लेने कोई नहीं आ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि सस्ती दरों पर आवंटन के लिए खोले गए समाजवादी आवास योजना के तहत रश्मिलोक, रतनखंड और देवपुर पारा में फ्लैटों को भी खरीदार नहीं मिले। रतन खंड व रश्मिलोक कानपुर रोड में इस योजना के तहत बनाए जा रहे 300 फ्लैटों के लिए महज दो खरीदारों ने आवंटन कराया। अधिकारियों का कहना है कि इस समय विकास प्राधिकरण में करीब 250 करोड़ रुपये के मकान बिना बिके खड़े हैं।
 
पहली बार अपनी आवासीय योजना की शुरुआत करने वाले लखनऊ नगर निगम का बुरा हाल है। लखनऊ नगर निगम रायबरेली रोड पर अपनी खाली पड़ी जमीन पर बहुमंजिला आवासीय कॉलोनी बना रहा है। इस योजना के लिए फ्लैटों की बुकिंग पिछले साल दिसंबर में खोली गई थी। योजना के मुताबिक नगर निगम को  27 महीनों में 648 फ्लैट तैयार करने थे।  रायबरेली रोड पर औरंगबाद खालसा इलाके में खाली पड़ी नगर निगम की जमीन पर बन रहे इन फ्लैटों में आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग (ईडब्लूएस) के लोगों को 10.50 लाख रुपये में फ्लैट दिए जाएंगे जबकि  मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के लिए 34.41 लाख रुपये व 25 लाख रुपये में 220 फ्लैट बनाए जा रहे हैं। उच्च आय वर्ग के लिए 63 लाख रुपये की कीमत में 372 फ्लैट बनाए जा रहे हैं। इन मकानों के लिए कई बार आवंटन की तारीख बढ़ाने के बाद भी अपेक्षित तादाद में खरीदार नहीं मिले हैं।
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