खाद्य सामग्री की जांच से बढ़ी लैब उपकरण की मांग

सुशील मिश्र | मुंबई Apr 25, 2018 09:52 PM IST

महाराष्ट्र में प्लास्टिक पर पाबंदी और खाद्य सामाग्री की गुणवत्ता जांच की अनिवार्यता ने लैब मशीनरी की मांग बढ़ा दी है। टेक्सटाइल और चमड़ा उद्योग की वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्पर्धा ने भी लैब परिक्षण उद्योग को नई मजबूती दी है। फार्मा और रिसर्च इंडस्ट्री से कहीं आगे निकल चुका लैब परिक्षण अब उद्योगों की जरुरत बन चुकी है जिसके चलते घरेलू कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से पैर पसार रहीं हैं।   भारत में लैब इंडस्टी का हब हैदराबाद भले ही हो लेकिन अब महाराष्ट्र और मुंबई में यह इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। लैब परिक्षण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स और उपकरणों की बढ़ती मांग की वजह से पहली बार मुंबई में इंडिया लैब मेला का आयोजन किया गया है जिसमें 12 विदेशी कंपनियों सहित कुल 92 कंपनियां अपने उपकरणों के साथ शामिल हुई हैं। इंडिया लैब एक्सपो की निदेशक अविशा देसाई कहती हैं कि लैब इंडस्ट्री का ट्रेंड बदल रहा है। मुंबई में पहली बार आयोजित इस एक्सपो में क्रेता और विक्रेताओं के बीच कुल 300 मीटिंग होनी हैं जिनमें करीब 250 करोड़ रुपये के उपकरणों की बिक्री होने का अनुमान है। हैदराबाद की अपेक्षा मुंबई का कारोबार भले कम दिख रहा है लेकिन यहां मांग हैदराबाद की अपेक्षा ज्यादा है। हैदराबाद में हुए एक्सपो में 429 करोड़ रुपये के उपकरणों का सौदा हुआ था। मुंबई में मांग बढऩे की वजह प्लास्टिक और फूड इंडस्ट्री की ओर से आ रही तेज मांग है। 
 
पर्यावरण को बचाने के लिए महाराष्ट्र में डिस्पोजल प्लास्टिक के उत्पादन और इस्तेमाल पर पाबंदी से परेशान कारोबारी विकल्प की तलाश शुरू कर चुके हैं। प्लास्टिक बैग मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव नीमित पुनमिया कहते हैं कि इंडस्ट्री बुरी तरह से फंस चुकी है। उससे निकलने का रास्ता तो निकालना होगा, पर्यावरण को बचाने के लिए महाराष्ट्र में डिस्पोजल प्लास्टिक के उत्पादन और इस्तेमाल पर पाबंदी से महाराष्ट्र में कारोबारियों के करीब 14,500 करोड़ रुपये और बैंकों के करीब 22,000 करोड़ रुपये फंस चुचे हैं जबकि करीब पांच लाख लोग बेरोजगारी की राह पर हैं। इन सब को बचाने के लिए प्लास्टिक का विकल्प या फिर प्लास्टिक को किस तरह से इस्तेमाल किया जाए ताकि कथित पर्यावरण के नुकसान से निकला जा सके, इसके लिए आधुनिक लैबों की जरुरत है जिस पर चर्चा चल रही है। प्लास्टिक के साथ चमड़ा उद्योग भी आधुनिक लैब की जरुरत महसूस कर रही है। चमड़ा उद्योग से जुड़े जुबेर खान कहते हैं कि आज वैश्विक स्तर पर कई तरह के परिक्षणों से गुजरना होता है जिसके लिए आधुनिक लैब की महाराष्ट्र और उत्तर भारत में सख्त जरुरत है। फिलहाल लैबों की संख्या कम है इसीलिए लोग इसमें निवेश करने के लिए तैयार हैं।  लैब इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा मांग फूड इडस्ट्री से आ रही है क्योंकि सरकार ने खाद्य सामाग्री की गुणवत्ता जांच को अनिवार्य कर दिया है। महाराष्ट्र फूड सामाग्री निर्यात करने में सबसे आगे हैं इसीलिए खाद्य सामाग्री की जांच करने वाले लैब और उनके उपकरणों की मांग हैदराबाद से कहीं ज्यादा है जबकि हैदराबाद में फार्मा और केमिकल्स वाले उपकरणों की मांग अधिक रहती है। एफडीए के लैब उपकरणों की मांग 6 फीसदी के हिसाब से बढ़कर 1,01,363 करोड़ (12.50 बिलियन यूरो) रुपये पहुंच चुकी है। 
 
भारत में जांच और परीक्षण की मांग 25 फीसदी बढ़ी है। भारत में बदलाव साफ दिख रही है, अभी भी भारतीय लैब इंडस्ट्री में उपयोग होने वाले उपकरणों में करीब 70-80 फीसदी विदेशों से आयात किए जा रहे हैं लेकिन पिछले कुछ सालों से भारतीय कंपनियों ने अपना दमखम दिखना शुरू किया है और वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी चार फीसदी तक पहुंचने में सफल हुए हैं। मुंबई में चल रहे एक्सपो में भारतीय कंपनियों की संख्या 80 है जो उनके उत्पाद विदेशी कंपनियों से कई मायनों में बेहतर है। 
कीवर्ड mumbai, food, lab,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक