प्लास्टिक खिलौना कारोबार में पाबंदी की गहराती आशंका

सुशील मिश्र | मुंबई Apr 26, 2018 09:47 PM IST

प्लास्टिक कचरे पर नियंत्रण की कवायद से खिलौना उद्योग एवं बच्चों के उत्पादों पर असर पड़ रहा है। भारतीय खिलौना उद्योग को विदेशी कंपनियों से पहले ही चुनौती मिल रही थी, लेकिन अब उसके लिए एक और समस्या खड़ी हो गई है। देसी खिलौना उद्योग विदेशी कंपनियों से मुकाबला करने और वैश्विक स्तर पर अपने उत्पादों की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए डिजाइन एवं शोध केंद्र खोलने की मांग कर रहा है।  खिलौना उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि विदेशी कंपनियों से चुनौती नई बात नहीं है, लेकिन इस समय सबसे बड़ी चुनौती महाराष्ट्र में प्लास्टिक पर पाबंदी है। खिलौना और दूसरे उत्पादों के घरेलू बाजार में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी विदेशी कंपनियों की है, जिनमें चीनी उत्पाद बाजार में खासे प्रचलित हैं। कारोबारियों की शिकायत है कि महाराष्ट्र सरकार की तरफ से उन्हें अब तक कोई जानकारी या दिशानिर्देश नहीं दिए गए हैं। 
 
टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय अग्रवाल ने कहा कि वह प्लास्टिक पर पाबंदी का स्वागत करते हैं, लेकिन कई ऐसी कंपनियां हैं, जो निर्धारित मानकों का उल्लंघन कर रही हैं। अग्रवाल ने कहा कि अगर राज्य सरकार दिशानिर्देश पूरी तरह स्पष्टï करें तो खिलौना उद्योग उनके साथ चलने को  तैयार हैं। चिक्को ब्रांड के सीईओ राजेश वोहरा कहते हैं कि भारतीय बाजार में विदेशी कंपनियों का कब्जा है, लेकिन अब स्थिति सुधर रही है। उन्होंने कहा, 'भारतीय कंपनियां अब विदेशी बाजारों में भी खिलौने और शिशु उत्पाद बेच रही हैं।' वोहरा ने कहा कि प्लास्टिक पर पाबंदी से निपटने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।
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