बाइक टैक्सी की नीति अगले महीने

एजेंसियां | भोपाल Apr 29, 2018 09:51 PM IST

मध्य प्रदेश आने वाले पर्यटक जल्दी ही बाइक टैक्सी का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके जरिये वे शहरों की तंग गलियों से आसानी से गुजर सकेंगे और उन्हें ट्रैफिक जाम की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। उज्जैन में 2016 में सिंहस्थ मेले के दौरान इस योजना का सफल परीक्षण किया गया था और अब राज्य का परिवहन विभाग बाइक टैक्सियों के लिए एक नीति लेकर आ रहा है। मध्य प्रदेश के परिवहन आयुक्त शैलेंद्र श्रीवास्तव ने कहा, 'हम अगले महीने मोटरबाइक टैक्सियों के लिए एक नीति लेकर आ रहे हैं। इन टैक्सियों का संचालन ऐप के जरिये होगा।' सिंहस्थ मेले के दौरान ट्रैफिक की समस्या से बचने के लिए इस तरह की सेवा की अनुमति दी गई थी और अब दोपहिया टैक्सियों के नियमन के लिए एक नीति बनाई जा रही है। उन्होंने कहा, 'सिंहस्थ के दौरान बाइक टैक्सियों के लिए 3 महीने का अस्थायी परमिट दिया गया था। इसके बाद परिवहन विभाग ने नीति का मसौदा जारी किया था और इस पर लोगों से सुझाव मांगे गए थे। अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राज्य सरकार के स्तर पर इस नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है और इसे मई में जारी किए जाने की संभावना है।'
 
अभी तक सरकार ने केवल इंदौर में ही एक कंपनी को इस तरह की सेवा चलाने की अनुमति दे रखी है। नीति के जारी होने के बाद दूसरी बाइक टैक्सी कंपनियों के लिए भी लाइसेंस लेना आसान होगा। श्रीवास्तव ने कहा कि सभी सुरक्षा मानकों के अलावा बाइक चलाने वालों को एक अतिरिक्त हेलमेट रखना पड़ेगा जिसे बाइक टैक्सी किराये पर लेने वाला व्यक्ति पहनेगा।  उन्होंने कहा, 'पूरी जांच पड़ताल और सुरक्षा मानकों के बाद ही परमिट जारी किए जाएंगे। ऐसी सेवा चलाने के लिए कंपनी या ऑपरेटर के पास कम से कम 25 बाइक टैक्सी होनी चाहिए।' प्रस्तावित मसौदा नीति के मुताबिक अगर कोई बाइक टैक्सी की सेवा लेता है तो बाइक चालक की तस्वीर और उसके बारे में विस्तृत जानकारी ऐप पर उपलब्ध होनी चाहिए। इन टैक्सियों का किराया क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) तय करेगा। साथ ही यह प्रस्ताव भी किया गया है कि टैक्सियों पर जीपीएस के जरिये नजर रखने की भी व्यवस्था होनी चाहिए। परिवहन विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बाइक टैक्सी के लिए लाइसेंस फीस के तौर पर हर साल 1,000 रुपये लिए जाएंगे। 
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