बुलेट ट्रेन की राह में जमीन का रोड़ा

सुशील मिश्र | मुंबई May 03, 2018 09:46 PM IST

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की राह में जमीन अधिग्रहण का मामला रोड़े अटका रहा है। जमीन अधिग्रहण में पेश हो रही रु कावटों के कारण परियोजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। महाराष्ट्र मेंपालघर और ठाणे के किसान बुलेट ट्रेन के प्रस्तावित मार्ग और जमीन अधिग्रहण की जबरन कोशिश का विरोध कर रहे हैं, वहीं गुजरात में भी तौर-तरीकों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले पर सियासी रंग चढ़ता देख परियोजना कार्य में बदलाव किए गए हैं ताकि  यह तय समय सीमा 2023 तक पूरी हो सके। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को उनकी जमीन के बाजार भाव दिए जा रहे हैं। 
 
बुलेट ट्रेन परियोजना से महाराष्ट्र के 108 गांव प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें 73 गांव पालघर जिले के हैं। महाराष्ट्र में कुल 509 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है, जिसमें 230 हेक्टेयर जमीन सिर्फ पालघर में है। किसानों के साथ राजनीतिक लोग भी विरोध में कूद पड़े हैं। राज ठाकरे ने सरकार पर आरोप लगाया है कि इस परियोजना के बहाने वह मराठी लोगों को मुंबई और आस पास के इलाकों से भगाने की कोशिश कर रही है।  महाराष्ट्र की तरह गुजरात में भी विरोध हो रहा है। कांग्रेस के नेता अहमद पटेल ने जमीन अधिग्रहण के तरीकों पर सवाल उठाए हैं और इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। परियोजना को अंजाम दे रहे नैशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचएसआरसी) को  दिसंबर 2018 तक जमीन अधिग्रहण का काम पूरा करना है। महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा-नगर हवेली में कुल 850 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। एनएचएसआरसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए कुल 1,400 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। 
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