कैराना व नूरपुर के लिए विपक्ष की साझा रणनीति

बीएस संवाददाता | लखनऊ May 06, 2018 08:57 PM IST

उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा और बिजनौर जिले की नूरपुर विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनावों को लेकर विपक्ष ने रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। हाल ही में हुए फूलपुर और गोरखपुर के उपचुनावों से और आगे जाकर वृहत विपक्षी एकता की नींव इन चुनावों के लिए रखी गई है। भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देने के लिए इस बार सपा-बसपा के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभावी चौधरी अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल भी साथ खड़ी है। समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के बीच को उपचुनावों को लेकर बनी सहमति में शनिवार को थोड़ा बदलाव हो गया। रालोद अब कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव लड़ेगा जबकि नूरपुर विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी उतारेगी। पूर्व सांसद तबस्सुम मुनव्वर रालोद और नईमुल हसन सपा उम्मीदवार होंगे। इसकी अधिकृत घोषणा रविवार को हो गई, जब तबस्सुम मुनव्वर ने चौधरी अजित सिंह से मिलकर आधिकारिक तौर पर रालोद की सदस्यता ले ली।
 
सपा मुखिया अखिलेश यादव और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच बीते शुक्रवार को लंबी बातचीत में तय हुआ था कि कैराना से सपा अपना प्रत्याशी उतारेगी और नूरपुर में रालोद चुनाव लड़ेगा। शनिवार को दोनों दलों के नेताओं में उच्चस्तरीय बातचीत के बाद कैराना सीट रालोद के लिए छोडऩे और नूरपुर में सपा को चुनाव लड़ाने पर सहमति बनी। यह भी तय हुआ कि दोनों दलों के नेता एकजुट होकर पूरी ताकत से उपचुनाव लड़ाएंगे। अब कैराना से तबस्सुम मुनव्वर रालोद की प्रत्याशी होंगी। वे 2009 में इसी सीट से बसपा के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं। उनके बेटे नाहिद हसन कैराना से सपा के विधायक हैं। तबस्सुम के मरहूम पति मुनव्वर हसन चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। तबस्सुम सपा से टिकट की दावेदार थीं, लेकिन रालोद के हिस्से में सीट जाने पर वह रालोद की प्रत्याशी होंगी।
 
नूरपुर सीट पर सपा के नईमुल हसन उम्मीदवार होंगे। वह पिछले दो चुनाव यहां से लड़ चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा से लोकेंद्र सिंह विजयी रहे थे। उन्हें 79,173 वोट मिले थे। सपा के नईमुल हसन को 66,436 और बसपा के गौहर इकबाल को 46 हजार वोट मिले थे। कैराना उपचुनाव में रालोद को सीट मिलने से उसके जाट-मुस्लिम समीकरण का इम्तिहान होगा। यह वही इलाका है जहां 2013 में दंगों से जाटों व मुसलमानों की एकता में दरार पड़ गई थी। रालोद से तबस्सुम मुनव्वर को उम्मीदवार बनाए जाने से भाजपा को इस सीट पर वोटों के ध्रुवीकरण की उम्मीद है। दरअसल, कैराना सीट पर मुस्लिम मतों की संख्या 5 लाख से ज्यादा है। लगभग सवा दो लाख दलित, डेढ़ से पौने दो लाख जाट, सवा लाख गुर्जर, एक लाख कश्यप मतदाता हैं। भाजपा ने हिंदुओं के पलायन का मुद्दा कैराना से ही उठाया था। इस नाते भी भाजपा इस सीट को हर हाल में जीतना चाहेगी।
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