विकास के दम पर जीतेंगे कर्नाटक

विभु रंजन मिश्रा और अर्चिस मोहन |  May 09, 2018 10:07 PM IST

दलित नेता और 8 सालों तक कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रहने वाले जी परमेश्वर ने विभु रंजन मिश्रा और अर्चिस मोहन से बातचीत में बताया कि कांग्रेस विधायी दल ही इस बात का फैसला करेगा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा

 
कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के बारे में आपका क्या आकलन है?
 
प्रधानमंत्री कर्नाटक के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा लेकर यहां नहीं आए हैं। उन्होंने इस बारे में बेहद कम बताया कि केंद्र में उनकी सरकार ने चार सालों के दौरान राज्य के लिए क्या किया है। क्या उन्होंने राज्य के लिए कोई विशेष पैकेज की घोषणा की? क्या यहां कोई सिंचाई परियोजना या कोई दूसरी परियोजना या राष्ट्रीय स्तर की परियोजना है? उन्होंने इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा। अब उनके कार्यकाल में काफी कम समय बचा है। ऐसे में वह क्या कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि पांच नदियों वाली परियोजना पर काम किया जाएगा। आखिर वह किस नदी परियोजना की बात कर रहे हैं? मौजूदा नदी जल साझा परियोजना में ही कई दिक्कतें हैं चाहे वह महादायी नदी का मसला हो या कावेरी का मसला हो। ऐसा तब है कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण ने अपना अंतिम फैसला दे दिया है। प्रधानमंत्री तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बुलाकर कह सकते थे कि यह पेयजल का मसला है, सिंचाई का नहीं इसलिए इसे सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए। यहां की जनता हमारे साथ है। वे जानते हैं कि उन्होंने क्या किया है।
 
मोदी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के दो सीटों से चुनाव लडऩे पर सवाल किया है। क्या आपको नहीं लगता है कि कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिस्पद्र्धी को यह मौका दे दिया है कि वे आपको शर्मिंदा करें?
 
प्रधानमंत्री यह सवाल कैसे उठा सकते हैं जब उन्होंने खुद 2014 के लोकसभा चुनावों में दो सीटों पर चुनाव लड़ा था? यह सवाल पूछने की उनकी विश्वसनीयता नहीं है। 
 
इससे संदेह हुआ कि सिद्धरमैया चामुंडेश्वरी सीट को लेकर घबरा रहे हैं इसीलिए वह बादामी से भी चुनाव लड़ रहे हैं
 
इस बात का भाजपा से क्या लेना-देना है। यह कांग्रेस पार्टी का फैसला है। अगर मुझे इस बात का डर है कि सभी लोग एक साथ मिलकर मुझे हरा देंगे तो मैंने दूसरी सीट से भी चुनाव लडऩे का फैसला कर लिया। इसमें गलत क्या है? यह हमारी पार्टी का आंतरिक मसला है। 
 
आपके आकलन के अनुसार चुनाव का रुख क्या होगा?
 
मुझे 30 सालों का अनुभव है। मैं सात विधानसभा चुनाव, पांच संसदीय चुनाव और अनेकों स्थानीय निकायों के चुनाव से जुड़ा रहा हूं। मेरा आकलन यह है कि कांग्रेस के पक्ष में लहर है। आम जनता का मानना है कि सरकार ने अच्छा काम किया है। हमारी सामाजिक कल्याण योजनाओं (अन्न भाग्य, इंदिरा कैंटीन, दूध योजना आदि) की तारीफ हो रही है। हमने सिर्फ दूध और चावल ही नहीं दिया बल्कि विकास भी किया है। सिंचाई के क्षेत्र में हमने अच्छा काम किया है और छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई के दायरे में है। पिछले पांच सालों के दौरान 3,500 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र लगाया गया है। सड़क और पुलों का निर्माण किया गया है। गुणवत्ता के लिहाज से हमारे राज्य मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग के समान स्तर पर हैं। 
 
पार्टी का मुख्य चुनावी मुद्दा क्या है?
 
हमारा मुख्य मुद्दा विकास है। पिछले साल हमने नकारात्मक चुनाव अभियान किया था। हमने कहा कि बीएस येदियुरप्पा जेल चले गए, सरकार में शामिल अन्य लोग जेल चले गए। उन्होंने कर्नाटक की संपत्ति बरबाद की। लेकिन इस बार हम भले ही लोगों को 2008 से 2013 तक भाजपा सरकार के कुशासन की याद दिलाएं लेकिन हम प्रगति और विकास को ही तवज्जो देंगे। 
 
लेकिन कांग्रेस पार्टी ने भी दागी लोगों को टिकट दिया है?
 
मैं यह स्वीकार करता हूं। ऐसे एक या दो लोग होंगे। लेकिन हमने जब टिकट दिया तो हमने बड़ी सावधानी से कानूनी और चुनावी मसलों को अलग किया। अगर लोग किसी भी पार्टी के दागी उम्मीदवार का चयन करते हैं तो यह उनका जनादेश होगा।
 
लेकिन कुछ रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के भीतर गुटबाजी और आंतरिक कलह की स्थिति भी है
 
कोई आंतरिक कलह नहीं है। कुछ मतभेद हैं जो किसी भी राजनीतिक दल में स्वाभाविक रूप से होते हैं। लेकिन टिकट वितरण की मांग को लेकर गुटबाजी की बात पूरी तरह गलत है। हां, अगर पार्टी सत्ता में आती है तो लोगों में मुख्यमंत्री बनने की महत्त्वाकांक्षा जग सकती है। अब कांग्रेस विधायी दल ही इस बात का फैसला करेगा कि मौजूदा स्थिति ही बरकरार रहे या फिर पार्टी आलाकमान स्थिति का आकलन करेंगे। 
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