छत्तीसगढ़ के हरित शिल्प को त्रिपुरा का साथ

आर कृष्णा दास | रायपुर May 10, 2018 10:21 PM IST

छत्तीसगढ़ में बांस के दस्तकारों को त्रिपुरा के दस्तकारों की तरह ही कौशल से लैस किया जाएगा। इसका मकसद राज्य में हरित शिल्प को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ बांस मिशन ने त्रिपुरा के बांस एवं केन विकास संस्थान (बीसीडीआई) के साथ समझौता किया है। इसके तहत बांस कारीगरों में क्षमताओं का विकास किया जाएगा। संस्थान का परिचालन वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत किया जा रहा है।  

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री महेश गागड़ा ने कहा, 'वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने में बांस की खेती अहम भूमिका अदा कर सकती है।' 

राज्य सरकार ने बांस किसानों की मदद के लिए एक योजना तैयार की है, जिसके तहत बांस की खेती से लेकर उत्पाद ढांचे और बिक्री तक में सहयोग मुहैया कराया जाएगा। योजना के अंतर्गत बीसीडीआई के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। संस्थान का गठन बदलती डिजाइन और खरीदारों की तकनीकी जरूरतों तथा दस्तकारों एवं शिल्पियों की मदद के लिए किया गया था। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशालाओं का आयोजन करता है और संसाधन केंद्र की तरह काम करता है।

केंद्र सरकार ने भी केन एवं बांस क्षेत्र के लिए पूरी मदद मुहैया कराई है ताकि इस क्षेत्र में उद्यम विकास आसानी से हो सके।

केंद्र सरकार का लक्ष्य केन एवं बांस संकुल के विकास के लिए तकनीकी सहायता की खातिर नोडल एजेंसी की तरह काम करने की है। छत्तीसगढ़ की कला में त्रिपुरा की बारीकियों का छौंक लगने से राज्य के दस्तकारों को अतिरिक्त लाभ होगा। देश भर में बांस की 130 किस्में हैं, जिनमें 21 किस्में त्रिपुरा में पाई जाती हैं। 

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