कर संग्रह बढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों से सीख लेगा बिहार

सत्यव्रत मिश्रा | पटना May 11, 2018 09:35 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में आ रही गिरावट से परेशान बिहार सरकार ने अब दूसरे राज्यों से सीख लेने का निर्णय किया है। इस साल राज्य सरकार ने 27 हजार करोड़ रुपये के कर राजस्व का लक्ष्य रखा है।  राज्य सरकार को जीएसटी लागू होने के बाद कर संग्रहण में भारी इजाफे की उम्मीद थी, लेकिन पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार राज्य की कमाई में 30.50 प्रतिाश्त की चपत लगी है। कर संग्रहण के मामले में पिछले वित्त वर्ष में राज्य सरकार अपने लक्ष्य से 37.5 फ ीसदी प्रतिशत पीछे रही थी। इस वजह से पिछले साल राज्य सरकार को केंद्र से 3,041 करोड़ रुपये से ज्यादा क्षति पूर्ति लेनी पड़ी।

 
बिहार के उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने वाणिज्य कर विभाग को देश के दूसरे राज्यों में टीम भेजने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, 'इस बारे में विभाग को हमने दो-तीन राज्यों का दौरा करने को कहा है। हम वहां जीएसटी के क्रियान्वयन का अध्ययन करेंगे और अपने राज्य में हो रही दिक्कतों को दूर करने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा जीएसटी को लेकर होने वाली परेशानी दूर करने के लिए हमने विभाग को सभी अंचलों में व्यापारियों के साथ बैठक करने को कहा है। ऐसी बैठक 4 महीने में एक बार आयोजित की जाएगी।' 
 
राज्य सरकार ज्यादा कर संग्रह के लिए बड़े कारोबारियों पर ध्यान देगी। मोदी ने कहा, 'बिहार में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करने वाले महज 36 व्यापारी ही हैं, जिनसे वाणिज्य कर विभाग को अपने कुल राजस्व का 46.4 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। इसके अलावा 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई वाले 597 कारोबारी विभाग को 44 प्रतिशत कर देते हैं। शेष 90 प्रतिशत कारोबारियों से हमें महज 9 प्रतिशत कर मिलता है। ऐसे में हमने ज्यादा कर देने वाले 10 प्रतिशत कारोबारियों पर ध्यान केंद्रित करनेे का निर्णय लिया है।
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