सस्ते मकानों के लिए पीपीपी मॉडल से भूमि अधिग्रहण

एजेंसियां | मुंबई May 17, 2018 09:41 PM IST

महाराष्ट्र सरकार मुंबई महानगर क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और सस्ते मकान बनाने के लिए निजी-सार्वजनिक सहभागिता (पीपीपी) नीति पर विचार कर रही है। इससे किफायती आवास निर्माण की योजना को गति मिलेगी। यह नीति अगले महीने मंत्रिमंडल के समक्ष पेश की जा सकती है।  राज्य के आवास मंत्री प्रकाश मेहता ने आज यहां एक कार्यक्रम के इतर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुंबई महानगर क्षेत्र में 100 से 500 एकड़ तक बड़े भूखंड हैं। लोग इनका विकास तो करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पैसा नहीं है। अगर वे खुद ही अपनी जमीन का विकास करें तो उन्हें 1 या अधिकतम 2.5 एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) मिल सकता है और उन्हें उस पर प्रीमियम देना होगा। 
 
नई नीति के तहत सरकार म्हाडा के जरिये इन भूखंडों का अधिग्रहण करेगी और उन पर सस्ते आवास बनाएगी। भूखंड मालिकों को मुआवजा मिलेगा। अभी इस बात पर विचार चल रहा है  कि मुआवजा किस प्रकार दिया  जाएगा।  मेहता ने कहा, 'भूखंड मालिकों को कीमत चुकाई जा सकती है या फिर मुआवजे के तौर पर उन्हें मकान दिए जा सकते हैं। मुआवजे के बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। उम्मीद है कि 10-15 दिन में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसके बाद इस नीति को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।' 
 
उन्होंने दावा किया कि इस नीति को मंजूरी मिलने के बाद करीब 10 लाख सस्ते मकान बनाए जा सकते हैं। आवास मंत्री ने कहा कि राज्य में सस्ते आवासों के विकास की योजना का जिम्मा पूरी तरह म्हाडा के पास होगा। सरकार की विभिन्न संस्थाओं के बीच भ्रम की स्थिति से बचने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने स्पष्टï किया है कि इस योजना के लिए म्हाडा अधिकृत एजेंसी होगी। अभी म्हाडा राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चल रही परियोजनाओं के लिए नोडल एजेंसी है। 
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