बिहार ने एनटीपीसी की बिजली पर ठोका दावा

बीएस संवाददाता | पटना May 21, 2018 09:49 PM IST

खुले बाजार में बिजली की बढ़ती कीमतों को देखते हुए बिहार सरकार ने एनटीपीसी से फिर बिजली की मांग की है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र भी लिखा है। ऊर्जा विभाग ने केंद्र से 317 मेगावॉट बिजली मांगी है। ऊर्जा एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त खुले बाजार में एक यूनिट बिजली की कीमत 8.23 रुपये हो गई है, जो पिछले साल 5.23 रुपये प्रति यूनिट थी। बिजली की बढ़ती मांग और कोयले की कमी दाम में अचानक इजाफे के लिए जिम्मेदार मानी जा रही हैं।  हालांकि बिजली कीमतों में इजाफे का सीधा असर बिहार सरकार के खजाने पर पड़ रहा है, इसलिए बढ़ती लागत कम करने के लिए राज्य सरकार ने अब एनटीपीसी की बाढ़ परियोजना से 317 मेगावॉट बिजल की मांग की है। इसके लिए मई की शुरुआत में ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। 

 

ऊर्जा सचिव को लिखे इस पत्र अमृत ने बाढ़ परियोजना के दूसरे चरण में बिहार की हिस्सेदारी वापस बहाल करने की मांग की थी। बाढ़ परियोजना के 1,320 मेगावॉट की क्षमता वाले दूसरे चरण में बिहार को 80 प्रतिशत बिजली आवंटित हुई थी। इसके तहत राज्य सरकार को 1,057 मेगावॉट बिजली मिली थी।  हालांकि सितंबर, 2017 में राज्य सरकार ने ऊंची कीमतों को कारण बताते हुए इसमें से 317 मेगावॉट केंद्र को वापस कर दी थी, जिसके बाद इस परियोजना में बिहार की हिस्सेदारी घटकर 50 प्रतिशत रह गई थी। अधिकारियों के मुताबिक उस वक्त खुले बाजार में बिजली 3-4 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिल रही थी, जबकि एनटीपीसी बिहार को करीब 5 रुपये की दर से बिजली बेच रही थी, इसलिए राज्य सरकार ने 317 मेगावॉट बिजली को वापस कर दिया था। 
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