मुंबई के पास वाडा में लगेगा स्टेविया का कारखाना

सुशील मिश्र | मुंबई May 24, 2018 09:41 PM IST

विश्व में चीनी का विकल्प बन रही स्टेविया यानी मीठी तुलसी के प्रसंस्करण के लिए देश का पहला संयंत्र मुंबई के करीब वाडा में शुरू किया जाएगा। औषधीय खेती करने वाले छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर के किसान डॉ राजाराम त्रिपाठी की कंपनी यह कारखाना लगाएगी। भारत में कई तरह के औषधीय पौधे पाए जाते हैं और पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। भारत में मीठी तुलसी का उत्पादन शुरू करने की तैयारी में जुटी मां दंतेश्वरी हर्बल लिमिटेड के मुखिया डॉ त्रिपाठी कहते हैं कि देश में स्टेविया की खेती उतने बड़े पैमाने पर नहीं हो रही है जितनी जरूरत है, लेकिन उनकी कंपनी देश में स्टेविया की खेती को बढ़ावा देने के साथ ही ठाणे जिले के वाडा और छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में प्रसंस्करण संयंत्र लगाने जा रही है। उन्होंने बताया कि वाडा में तीन हजार एकड़ में स्टेविया की खेती की तैयारी शुरू हो गई है। स्टेविया की खेती के लिए किसानों का समूह बनाकर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। वाडा के संयंत्र के लिए सालाना 2,800 टन स्टेविया की पत्तियों की जरूरत होगी। कारखाने के लिए कच्चा माल किसान उपलब्ध कराएंगे जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। डॉ त्रिपाठी ने बताया कि चीनी से 300 गुना अधिक मीठे स्टेविया में शून्य कैलोरी होती है। सरकार ने खाद्य व पेय पदार्थों में इसके इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। 
 
देश-विदेश में स्टेविया की मांग तेजी से बढ़ रही है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) स्टेविया की नई किस्म विकसित की है जिसमें कड़वाहट नहीं है। यह दुनिया को भारत की देन है। परिषद के साथ मां दंतेश्वरी हर्बल लिमिटेड ने दो करार किए हैं। स्टेविया मूल रूप से पराग्वे का पौधा है। 
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