जड़ी-बूटी के लिए डाबर ने किया छत्तीसगढ़ से करार

आर कृष्णा दास | रायपुर May 24, 2018 09:42 PM IST

देश की अग्रणी एफएमसीजी कंपनियों में एक डाबर इंडिया लिमिटेड छत्तीसगढ़ में जड़ी-बूटी एवं आयुर्वेदिक उत्पादों के विनिर्माण में औषधीय पौधे एवं जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करेगी। कंपनी ने राज्य नियंत्रित छत्तीसगढ़ औषधीय पौधा बोर्ड के साथ समझौते के एक मसौदे पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत बोर्ड डाबर को औषधीय पौधे एवं जूड़ी-बूटी मुहैया कराएगा। बोर्ड के चेयरमैन रामप्रताप सिंह ने कहा, 'जड़ी-बूटी एवं औषधीय उत्पादों के विनिर्माण के लिए बोर्ड डाबर को कच्चा माल मुहैया कराएगा। कंपनी को ग्राम स्तरीय वन प्रबंधन समिति के माध्यम से ये उत्पाद मुहैया कराए जाएंगे।' इससे 800 समितियों से जुड़े 4,000 लोगों को इसका लाभ होगा। खनिज संपदा से संपन्न छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधे एवं जड़ी-बूटी भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। 

 
अनुमान के अनुसार राज्य में 1,500 करोड़ रुपये मूल्य के औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटी का कारोबार होता है। राज्य में वनोपज का उत्पादन एवं संग्रहण जीविकोपार्जन के लिए वन संपदा पर निर्भर लोगों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होने में मदद करता है। सिंह ने कहा, 'डाबर के साथ समझौते से न केवल औषधीय पौधे आदि लगाए जाने को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त आय भी मुहैया की जाएगी।' कंपनी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए पौधशाला स्थापित करेगी। सरकार ने राज्य को 'हर्बल स्टेट' घोषित किया है। इस पहल का मकसद औषधीय पौधों का संरक्षण, इनका उत्पादन, संगंठित कारोबार को बढ़ावा और छोटे वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार की अतिरिक्त संभावनाए सृजित करना और लोगाों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। 
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