देश के सर्वाधिक अशांत राज्यों में तमिलनाडु

टीई नरसिम्हन | चेन्नई May 27, 2018 11:04 PM IST

करीब 7 साल पहले एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा था कि उनकी कंपनी ने तमिलनाडु को इसलिए चुना क्योंकि यह एक शांतिपूर्ण राज्य है और इसने कानून-व्यवस्था को ठीक से संभाला है। आज राज्य में चल रहे प्रदर्शन और हिंसा ने उनको अपना मत बदलने को मजबूर कर दिया है। तमिलनाडु के एक गैर-निवासी ने शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करने के लिए यहां बसने का निर्णय किया था लेकिन अब वह यहां से निकलने का मौका ढूंढ रहे हैं। 

यह कोई इकलौता उदाहरण नहीं है। तमिलनाडु की ज्यादातर औद्योगिक इकाइयां जो सामाजिक सौहार्द चाहती हैं अब अपना विस्तार राज्य के बाहर करना चाहेंगी। तमिलनाडु से बाहर अपना विस्तार के लिए 8-10 अरब रुपये से अधिक खर्च कर रही एक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि राज्य में बेहतर कारोबारी माहौल के बावजूद निवेश आकर्षित करने के लिए संघर्षरत इस राज्य को इस घटना से बड़ा धक्का लगेगा।     

इन दिनों लोगों के गुस्से का अड्ïडा बन चुके तमिलनाडु देश के सर्वाधिक अशांत राज्यों में शामिल हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2015 में राज्य में 20,450 आंदोलन हुए। भले ही पिछले वर्ष की तुलना में प्रदर्शनों की संख्या 500 कम रही लेकिन राज्य इस मामले में देश में अग्रणी रहा। उसके बाद पंजाब में 13,089, उत्तराखंड में 10,477 और दिल्ली में 10,039 प्रदर्शन हुए। तमिलनाडु में राजनीतिक दलों द्वारा 8,312 आंदोलन आयोजित किए गए जो कि देश में सर्वाधिक है। संख्या के लिहाज से राज्य में राजनीतिक प्रदर्शन के बाद सरकारी कर्मचारियों, श्रम संगठनों, छात्रों और सांप्रदायिक समूहों द्वारा आयोजित आंदोलन रहा।  पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में, राज्य ने आंदोलन के मामले में अपनी अग्रणी स्थिति को बरकरार रखी। यहां प्रतिदिन औसतन 47 आंदोलन हुए जो कि देश भर में हुए आंदोलनों का 25 प्रतिशत है। 

हाल के आंदोलनों में श्रीलंका में तमिलों की एकजुटता को लेकर अभिव्यक्ति, जल्लीकट्ïटू के पक्ष में आंदोलन, राष्टï्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा  के विरोध में प्रदर्शन, बस किराया बढ़ोतरी, किसानों की कर्ज माफी और कावेरी जल से जुड़े विवाद को याद किया जा सकता है। यहां बीते एक या दो साल में लंबी अवधि के विरोध भी हुए। इसमें कुडनकुलम में नाभिकीय विद्युत संयंत्रों के विस्तार के विरोध में राज्य के तटवर्ती गांव इदिंथाकरै में हुआ विरोध उल्लेखनीय है। इसी तरह से गेल की गैस पाइपलाइन परियोजना, मीथेन परियोजनाओं, हाइड्रोकार्बन परियोजनाओं और न्यूट्रिनो योजना के विरोध में भी लोगों ने लंबा संघर्ष किया था। 

कीवर्ड पाइपलाइन परियोजना, मीथेन परियोजनाओं, हाइड्रोकार्बन,

  
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