दवाओं पर सरकार की नजर

आर कृष्णा दास | रायपुर Jun 04, 2018 09:58 PM IST

देश में दवा मूल्य निर्धारण तंत्र में सुधार की प्रकिया शुरू करने के बाद अब नरेंद्र मोदी सरकार की योजना इलाज में काम आने वाली सामग्री (औषधीय उत्पादों) को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने की है। इस महीने के अंत में सरकार औषधीय उत्पादों के लिए नया मूल्य सूचकांक लाने की योजना बना रही है जो दवा कीमतों के निर्धारण का मानदंड होगा। दवा मूल्य नियामक राष्टï्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आधार पर साल में एक बार खुदरा कीमतों में बदलाव करता है।    
 
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्ïडा ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'अब हमारी तैयारी औषधीय उत्पादों की कीमत में बदलाव करने की है। औषधीय उत्पादों के लिए भी उच्चतम मूल्य सीमा होनी चाहिए और सरकार इस दिशा में कदम उठाने जा रही है।'  नड्ïडा ने कहा कि सरकार इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ चुकी है और अब आम आदमी के हितों की रक्षा के लिए औषधीय कंपनियों पर न केवल जुर्माना लगाया जाएगा बल्कि उनपर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। जरूरी दवाइयों की सूची को बढ़ाया गया है और अब इसमें 1000 नई दवाइयों को शामिल किया गया है जिनकी संख्या आगे और बढ़ेगी। सरकारी फार्मेसी, अफोर्डेबल मेडिसिन्स ऐंड रिलायबल इम्पलांट फॉर ट्रीटमेंट (एएमआरआईटी) के माध्यम से 600 करोड़ रुपये की दवाएं 135 दुकानों के जरिये बेची गई थी जिससे कैंसर और हृदय रोग के मरीजों को 350 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचा है।    
 
कुछ राज्यों की ओर से विरोध होने के बावजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि प्रधानमंत्री राष्टï्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के तहत गरीब परिवारों का स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना की प्रगति तेज होगी।   नड्ïडा ने कहा, '15 जून तक देश के सभी राज्य योजना को लागू करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर कर देंगे। इस योजना के तहत समाज के कमजोर तबके के 10 करोड़ परिवार से 50 करोड़ लोगों को 5,00,000 रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।' 
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