साफ -सुथरी बनेगी 'खाऊ गली'

सुशील मिश्र | मुंबई Jun 08, 2018 09:45 PM IST

ऐसा कहा जाता है कि दुनिया के महंगे शहरों में शुमार होने के बावजूद मुंबई में कोई भूखा नहीं सोता है। इसका श्रेय मुंबई की खास पहचान बन चुकीं खाऊ गलियों (फूड स्ट्रीट्स) को जाता है। अब महाराष्ट्र सरकार इन्हें साफ-सुथरा खाना उपलब्ध कराने के लिए कहेगी। राज्य सरकार पूरे महाराष्ट्र में ऐसी पहल करेगी।  राज्य सरकार ने होटलों को साफ-सफाई में रेटिंग देने के साथ ही खाऊ गलियों को भी प्रोत्साहित करने की नीति तैयार की है। स्वच्छ एवं सेहतमंद भोजन सुनिश्चित करने के लिए शुरू में मुंबई के जुहू चौपाटी, गिरगांव चौपाटी, पुणे के सारसबाग और नागपुर के फुटाला तालाब की खाऊ गलियों को 'क्लीन स्ट्रीट फूड हब' बनाया जाएगा। क्या खाने लायक है और क्या नहीं है, इसकी भी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, साथ ही मोबाइल टेस्टिंग लैब के साथ खान-पान के स्टॉलों पर नजर भी रखी जाएगी।
 
घाटकोपर, चेंबूर, कार्टर रोड, मोहम्मद अली रोड, माहिम, एसएनडीटी, खारघर, ताडदेव खाऊ गली, बांद्रा की खाऊ गली समेत मुंबई में करीब 150 खाऊ गलियां हैं। यहां मिलने वाला जायका बड़े से बड़े होटलों में भी नहीं मिल पाता है और कीमत भी कम है। नरीमन पॉइंट में भी 50-60 रुपये में खाना मिल जाता है। कई तरह के डोसे, पावभाजी, वड़ा-पाव, मिसलपाव, भेलपूरी, सैंडविच, पूडी भाजी, दाल चावल, जूस आदि इन खाऊ गलियों में मिल जाते हैं।   अन्न एवं नागरी आपूर्ति मंत्री गिरीश बापट ने कहा कि खाद्यान्न सुरक्षा के लिए राज्य ने कई योजनाए चलाई हैं। बापट ने कहा, 'राज्य में अन्न सुरक्षा के बारे में की जा रही पहल का अनुकरण देश के दूसरे राज्य भी कर रहे हैं। सुरक्षित और स्वच्छ खाना मिलना सबका अधिकार है।' हालांकि खाऊ गलियों के कारोबारियों को मुहिम की जानकारी नहीं है और वे कहते हैं कि बरसात में नियम-कायदे बढ़ जाते हैं तथा बाद में खत्म हो जाते हैं।  लेकिन अन्न एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉक्टर पल्लवी दराडे कहती है कि जो भी कार्रवाई की जाती है उसका जानकारी ऑनलाइन दी जाती है। खाद्य पदार्थों की जांच के लिए आवश्यक फूड लैब की मांग मंजूर हो चुकी है। इसके अंतर्गत अब राज्य को दस करोड़ रुपये कीमत की दो मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब मिलेंगी। 
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