रमजान में सेवई की बढ़ गई शान

बीएस संवाददाता | लखनऊ Jun 11, 2018 09:44 PM IST

रमजान के मौके पर उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बनारस की सेवई की मांग देश भर में बढ़ गई है। हालत यह है कि सेवई कारखानों में 24 घंटे काम होने के बावजूद मांग पूरी नहीं हो पा रही है। कारोबारियों का कहना है कि सेवई पर जीएसटी लगने और इनकी कीमतें बढऩे के बावजूद मांग पर रत्ती भर असर नहीं पड़ा है, बल्कि इसमें और तेजी आई है। इस बार लखनऊ की मध्यम मोटाई वाली सेवई की कीमत 20 रुपये से शुरू होकर 55 रुपये किलोग्राम तक है, जबकि बनारस की सेवई 30 रुपये से लेकर 70 रुपये तक में मिल रही है। सेवई कारखाने चलाने वाले लोगों का कहना जीएसटी लगने से कीमतें थोड़ी बढ़ गई हैं, लेकिन इससे मांग पर कोई असर नहीं हुआ है। 
 
जबरदस्त मांग के मद्देनजर लखनऊ के बाहरी और पुराने इलाकों में नए सेवई कारखाने भी खुल गए हैं। लखनऊ में  60 से ज्यादा कारखानों में सेवई तैयार हो रही है। अवध के नवाबी घराने से संबंधित हुसैन अफसर बताते हैं कि ईद के मौके पर संपन्न घरों में किमामी सेवई भी बनती है, जिसके लिए महीन सेवई का इस्तेमाल होता है। लखनऊ में ही किमामी, लच्छे और रुखी सहित कई दर्जन अलग-अलग तरीकों की सेवई तैयार की जाती है। तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल में लखनऊ की सेवई की सबसे अधिक मांग है। 
 
पुराने लखनऊ में दरगाह हजरत अब्बास मोहल्ले में सेवई कारखाना चलाने वाले हारून रशीद का कहना है कि रमजान से लेकर बकरीद तक सेवई की खासी मांग रहती है। रशीद के मुताबिक खाने के लिए फटाफट तैयार हो जाने वाले लच्छे की मांग तो साल भर बनी रहती है, जबकि किमामी सेवई की सबसे ज्यादा मांग ईद और बकरीद में ही होती है। लखनऊ में पिछले तीन दशक से सेवई का कारोबार करने वाले अशरफ हुसैन का कहना है इस साल रमजान में ही शहर के कारखानों को करीब 5 करोड़ रुपये का ऑर्डर बाहर के  शहरों से मिला है।
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