खाड़ी देशों में बनारसी सेवई की मिठास

अजय मिश्र | वाराणसी Jun 14, 2018 09:52 PM IST

ईद के मौके पर बनारसी सेवइयों की मिठास और भीनी सुगंध देश के विभिन्न राज्यों सहित खाड़ी देशों तक फैल रही है। बनारसी सेवई की खासियत यह है कि इसे मशीन से नहीं बल्कि हाथों से बनाया जाता है। यही वजह है कि इन सेवाइयों की ईरान, इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में काफी मांग है। बनारसी सेवई बनाने वालों का कहना है कि खाड़ी देशो में कीमामी (छत्ता-लच्छा), डंडा व पराठा सेवइयों की सर्वाधिक मांग है। बनारसी सेवई और बनारसी सेमी सेवई का उत्पादन वाराणसी के भदऊ चुंगी क्षेत्र में होती है। बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से यह क्षेत्र सेवई मंडी के नाम से प्रसिद्ध हो गया है। खास बात यह कि रमजान के पाक महीने में मुस्लिम परिवारों में इस्तेमाल की जाने वाली सेवइयां हिंदू कारीगर बनाते हैं। त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए डेढ़ माह पहले से ही कारीगर काम में जुट जाते हैं। सेवई के प्रमुख निर्माता रविशंकर गुप्ता और सचिन मौर्य का कहना है कि दूध-फेनी सेवई के अच्छे कारीगर कानपुर एवं बिहार से बुलाये जाते हैं जो 1,000 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल मजदूरी पर माल तैयार करते हैं। पराठा सेवई का उत्पादन मदनपुरा एवं बड़ी बाजार इलाके में होती है। 

 
स्थानीय निर्माता एवं विक्रेताओं का खाड़ी या अन्य देशों से सीधा संपर्क नहीं है लेकिन मुंबई, कोलकाता के व्यापारी और निर्यातक इनसे संपर्क कर सेवइयां खाड़ी व अन्य देशों को भेजते हैं।  सेवई उत्पादक रामनरेश के अनुसार इस वर्ष सेवई के दाम में पिछले वर्ष की तुलना में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। किमामी सेवइयां 5 से 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रहा है जबकि लच्छा सेवइयां 3,400 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल है। मशीन से बनने वाली सेवई की कीमत 4,100 से 4,200 रुपये प्रति क्विंटल है। 
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