नाणार परियोजना की खिसकती जमीन!

सुशील मिश्र | मुंबई Jun 14, 2018 09:52 PM IST

कोंकण इलाके में बनने वाली दुनिया की सबसे बड़ी नाणार तेल परियोजना पर संकट के बादल गहराते जा रहे हैं। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की राह में मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में भाजपा की सहयोगी शिवसेना भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया रद्द करने की मुहिम चला रही है। शिवसेना का दावा है कि नाणार परियोजना अब लगभग डिब्बाबंद होने के कगार पर पहुंच गई है।  हालांकि तमाम बाधाओं के  बावजूद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस परियोजना के पक्ष में खड़े हैं। दूसरी तरफ राज्य के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई का कहना है कि जिन 14 गांवों की जमीन अधिग्रहीत होनी थी, उनमें 10 गांव जमीन देने से मुकर गए हैं। 
 
स्थानीय लोग  इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं जिनका शिवसेना समर्थन कर रही है। पिछले सप्ताह शिवसेना के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर भूमि अधिग्रहण रद्द किए जाने की मांग की थी। शिवसेना के अलावा पूरा विपक्ष इस परियोजना के विरोध में लामबंद हो चुका है। फडणवीस का कहना है कि परियोजना पर बात बहुत आगे बढ़ गई है, इसलिए राज्य सरकार पीछे हटेगी तो उसकी और देश दोनों की बदनामी होगी। मुख्यमंत्री लगातार कहते रहे हैं कि इस परियोजना से लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। 
 
ऐसा अनुमान है कि परियोजना के लिए करीब 15 हजार एकड़ जमीन की जरूरत होगी। इस परियोजना पर 2.86 लाख करोड़ रुपये लागत आने की बात कही जा रही है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी आरामको इसमें 50 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए तैयार हो चुकी है। समझौते के अनुसार आरामको इस प्रस्तावित रिफाइनरी में 1.44 लाख करोड़ रुपये निवेश करेगी।
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