बंटेगी बेतिया राज की 14,300 एकड़ जमीन

बीएस संवाददाता | पटना Jun 12, 2018 09:44 PM IST

बिहार और उत्तर प्रदेश सरकारों ने पूर्ववर्ती बेतिया राज की जमीन किसानों को देने का निर्णय लिया है। इससे दोनों प्रदेशों में करीब 14,300 एकड़ जमीन भूमिहीन किसानों को मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिए दोनों सरकारें पहले जमीन का सर्वेक्षण कराएंगी।  बिहार और उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों की पटना में इस बारे में एक संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता बिहार के राजस्व पर्षद के अध्यक्ष सुनील कुमार ने की। बैठक के दौरान दोनों राज्य इस पूर्ववर्ती जमींदारी की संपत्ति के सर्वेक्षण को लेकर एकमत हुए। 
 
अधिकारियों ने बताया, 'दोनों राज्यों के 9 जिलों में बेतिया राज की 14,291 एकड़ जमीन हुआ करती थी। इसका एक बड़ा हिस्सा बिहार के पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में है। उत्तर प्रदेश के 3 जिलों में भी करीब 100 एकड़ जमीन है।' इसके तहत बिहार में आज के पश्चिमी चंपारण में 9,538 एकड़ जमीन और पूर्वी चंपारण में 4,533 एकड़ जमीन थी। सारण में 38 एकड़, गोपालगंज में 35 एकड़, सीवान में 7 एकड़ और पटना में 4 एकड़ जमीन थी।  इसके अलावा, बिहार और उत्तर प्रदेश के अहम शहरों में कई भवन भी बेतिया राज के स्वामित्व में थे। इस बारे में संबंधित जिला प्रशासनों को तीन महीने में सर्वेक्षण कार्य पूरा करने के लिए कहा गया है। इस दौरान अधिकारियों को इस जमीन को अतिक्रमण से भी मुक्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। 
 
राज्य सरकार ने हर दिन करीब 20 एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, दोनों राज्यों ने खेती योग्य जमीन का सर्वेक्षण अलग से कराने का फैसला लिया है। इसके बाद यह जमीन किसानों को दी जाएगी।  सर्वेक्षण की निगरानी खुद राजस्व पर्षद के अध्यक्ष करेंगे। दरअसल, आजादी से पहले बिहार के तत्कालीन चंपारण जिले में बेतिया राज एक बड़ी जमींदारी हुआ करती थी। अंग्रेजों  के साथ विशेष समझौते के तहत बेतिया राज को 'महाराज' की उपाधि दी गई थी। 
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