13 अरब रुपये के शेयरों का नहीं कोई दावेदार

सचिन मामबटा | मुंबई Apr 09, 2018 09:57 PM IST

गुमनाम शेयरधारक

करीब एक लाख से अधिक शेयरधारक ऐसे हैं जिनके पास देश की कुछ बड़ी कंपनियों के अरबों रुपये मूल्य के शेयर हैं लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने एसऐंडपी बीएसई 100 फर्मों की शेयरधारिता रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जिसमें पाया गया कि इन कंपनियों के पास कम से कम 13.02 अरब रुपये मूल्य के शेयर ऐसे हैं जिनका कोई दावेदार नहीं है। इन शेयरों का दावा नहीं करने के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें वारिसों को अपने पूर्वजों की विरासत के बारे में पता नहीं है और शेयर सर्टिफिकेट गुम हो गए हैं।

बिना दावे वाले शेयरों में सबसे ज्यादा मूल्य के शेयर आईटीसी के हैं। इसके पास 1.371 करोड़ शेयर ऐसे हैं जिनका कोई दावेदार नहीं है और इसका मूल्य करीब 3.6 अरब रुपये है। यह आंकड़ा दिसंबर तक हैं, जिसका विश्लेषण बिज़नेस स्टैंडर्ड ने किया है। इसी तरह रत्न एवं आभूषण कंपनी टाइटन के पास 1.6 अरब रुपये मूल्य के 17.1 लाख शेयर हैं, जिनके दावेदारों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। खनन कंपनी वेदांत के पास 95.7 करोड़ रुपये मूल्य के 34 लाख शेयर हैं।

बिना दावे वाले शेयरधारकों की संख्या के लिहाज से अंबुजा सीमेंट्स पहले नंबर पर है। इसके 166,277 शेयरधारकों के 11.4 लाख शेयर बिना दावे के हैं, जिनका मूल्य 27.11 करोड़ रुपये से अधिक है। आईटीसी के ऐसे शेयरधारकों की संख्या 7,083 हैं, वहीं टाइटन के 1,502 और वेदांत के 3,980 शेयरधारक हैं। हालिया प्रावधान की दृष्टिï से इस रकम का महत्व काफी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें कहा गया है कि ऐसे शेयरों को निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा कोष (आईईपीएफ) में हस्तांतरित करना होगा।

सलाहकार फर्म कॉर्पोरेट प्रोऊेशनल्स के पार्टनर अंकित सिंघी ने कहा कि हस्तांतरण प्रावधान कंपनी अधिनियम 2013 के साथ लागू किया गया है। इससे पहले कंपनियों को सात साल तक बिना दावे वाले शेयरों के लाभांश को आईईपीएफ में हस्तांतरित करना होता था। नए प्रावधान के तहत अब शेयरों को भी हस्तांतरित करना होता है और संशोधित प्रावधान की अधिसूचना 2016 में जारी की गई थी।

सिंघी के मुताबिक अगर लाभांश लंबित हो और निवेशक सात की अवधि के दौरान कम से कम एक बार लाभांश का दावा किया हो तो हस्तांतरण से बचा जा सकता है। ऐसे कुछ हस्तांतरण किए भी गए हैं। ज़ीह एंटरटेनमेंट इंटरप्राइजेज ने अपने रिकॉर्ड में उल्लेख किया है, '31 दिसंबर, 2017 को खत्म हुई तिमाही के दौरान बगैर दावे वाले 2,124 शेयरधारकों के 111,070 शेयरों को आईईपीएफ खाते में कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 124(6) के अनुसार हस्तांतरित किए गए हैं।' ऐसे शेयरों के हस्तांतरण में फर्जीवाड़े का पता चलने के बाद ही इस प्रावधान को अनिवार्य किया गया है। निवेशक शिकायत फोरम के हिनेश देसाई ने कहा कि हस्तांतरण में कोई समस्या नहीं है क्योंकि सरकार इसकी संरक्षक होती है और इन शेयरों की बिक्री नहीं हो सकती है। वर्तमान में यह व्यवस्था है कि इन शेयरों को रिफंड के लिए आईईपीएफ के पास दावा किया जा सकता है। 
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