नाको चने चबवाएगा चना ! तीन राज्यों में चने पर टिका भाजपा का भविष्य !

संजीव मुखर्जी |  Apr 12, 2018 10:31 PM IST

बंपर उपज, दाम कम

►  महाराष्ट्र और राजस्थान में भी फसल अच्छी
►  बंपर पैदावार से चने की कीमत एमएसपी से 18 से 30 फीसदी नीचे
►  सरकार ने 4,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है चने का एमएसपी
►  प्रमुख चना उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में चने का उत्पादन करीब 54 लाख टन होने का अनुमान
►  छत्तीसगढ़ में विपक्षी पार्टी कांग्रेस मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह जिले राजनंदगांव में कर रही 'चना सत्याग्रह'

देश में फसल वर्ष 2017-18 में चने का उत्पादन 1.1 करोड़ टन से अधिक हुआ है, जिससे इस जिंस के बड़े उत्पादक राज्यों में किसान और सरकार दोनों चिंतित हैं। इसकी वजह यह है कि चने के भाव सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,400 रुपये प्रति क्विंटल से करीब 18 से 30 फीसदी नीचे आ गए हैं।  चने की कीमतों में गिरावट के लिए, विशेष रूप से दो बड़े उत्पादक राज्यों - मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए इससे ज्यादा मुश्किल समय नहीं हो सकता था क्योंकि दोनों राज्यों में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने हैं।

पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में भी चने की गिरती कीमतें एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गई हैं। छत्तीसगढ़ में भी इस साल मध्य प्रदेश और राजस्थान के साथ ही विधानसभा चुनाव होंगे। छत्तीसगढ़ में विपक्षी पार्टी कांग्रेस मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह जिले राजनंदगांव में व्यापक 'चना सत्याग्रह' कर रही है। इससे राज्य मंत्रिमंडल को राज्य के 4 लाख किसानों के लिए 1,500 रुपये प्रति एकड़ की समर्थन कीमत की घोषणा करने के लिए बाध्य होना पड़ा।  देश में 60 फीसदी से अधिक चने का उत्पादन मध्य प्रदेश और राजस्थान में होता है। शेष उत्पादन महाराष्ट्र में होता है, जहां भाजपा का ही शासन है। देश के सबसे बड़े चना उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में इस साल उत्पादन करीब 54 लाख टन रहने का अनुमान है। यह देश में 2017-18 में होने वाले अनुमानित उत्पादन का करीब आधा है।

मध्य प्रदेश में चना न केवल रबी की प्रमुख फसल है, बल्कि यह राज्य के समृद्ध मालवा-निमाड़ क्षेत्र के आसपास के बहुत से सहायक उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति देता है। आधिकारिक अनुमान दर्शाते हैं कि इस साल इंदौर और उसके आसपास 3 से 5 लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं के बजाय चने की बुआई हुई है। किसानों ने ऐसा चने की बेहतर कीमतें मिलने की उम्मीद में किया। हालांकि भारी उत्पादन से कीमतों में तेजी से गिरावट आई है और इनके जल्द ही सुधरने की भी उम्मीद नहीं है।

 पिछले साल मालवा-निमाड़ क्षेत्र में किसानों के बड़े आंदोलन हुए थे, जिनमें मंदसौर जिले में 6 किसानों की मौत हो गई थी। तब से यह क्षेत्र मध्य प्रदेश में सभी तरह के किसान प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गया है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस किसानों के मुद्दों पर नजर बनाए हुए है और मालवा को अपने सभी विरोध-प्रदर्शनों का केंद्र बना रही है। इससे असहाय राज्य सरकार ने पहले चने को भावांतर भुगतान योजना में  शामिल किया। लेकिन केंद्र सरकार से वित्तीय मदद में देरी के कारण इसे योजना से वापस बाहर कर दिया। 

समय बीतता जा रहा है और चने की कीमतों में कोई सुधार नहीं आ रहा है, इसलिए राज्य सरकार ने केंद्र से कहा है कि वह कीमत समर्थन योजना के तहत किसानों से मसूर और सरसों के अलावा चने की भी खरीदारी करे। केंद्र ने राज्य में उत्पादित मसूर के 20 फीसदी हिस्सेा और सरसों के 40 फीसदी हिस्से की खरीद को मंजूरी दे दी है। लेकिन चने के लिए अभी तक औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। सूत्रों ने कहा कि राज्य ने केंद्र से आग्रह किया है कि वह अपनी एजेंसी नेफेड को राज्य में उत्पादित 54 लाख टन चने में से 23 लाख टन की खरीद 4,400 रुपये के एमएसपी पर करने का निर्देश दे।

कुछ अधिकारियों के मुताबिक इसका मतलब है कि मध्य प्रदेश से चने की खरीद के लिए 110 अरब रुपये की जरूरत होगी। सरकार ने नेफेड को 190 अरब रुपये की गारंटी दी है, जो पहले 95 अरब रुपये थी। अधिकारियों ने कहा कि नेफेड पांच राज्यों में चने की खरीद के लिए दी गई अपनी सरकारी गांरटी 190 अरब रुपये का करीब 58 फीसदी हिस्सा एक राज्य में और एक ही सीजन में चना खरीदने पर खर्च कर सकता है। सूत्रों ने कहा कि एक अंतरिम उपाय के रूप में नेफेड द्वारा करीब 5 लाख टन चना खरीदने का फैसला लिया गया है। 

इससे पहले राज्य अपने संसाधनों से 10 अप्रैल से चने की खरीद की योजना की घोषणा की थी क्योंकि और इंतजार करना मुश्किल होगा। छत्तीसगढ़ में भी राज्य ने किसानों का गुस्सा शांत करने के लिए उन्हें समर्थन कीमत के रूप में निर्धारित पैसा देने के लिए 1.2 अरब रुपये का आवंटन किया गया है। लेकिन रिपोर्टों में कहा गया है कि यह प्रोत्साहन अपर्याप्त है क्योंकि कीमतें समर्थन कीमत से ज्यादा गिर चुकी हैं। राजस्थान सरकार पहले ही 8 लाख टन चने और 4 लाख टन सरसों की एमएसपी पर खरीद शुरू कर चुकी है। राजस्थान देेश का तीसरा सबसे बड़ा चना उत्पादक राज्य है, जहां इस साल करीब 15.9 लाख टन चने के उत्पादन का अनुमान है। राजस्थान में भी कीमतों में गिरावट को लेकर बड़े किसान आंदोलन हुए हैं।

केंद्र सरकार ने राज्यों को किसानों से चने की खरीद में पूरी छूट दी है। इसके अलावा केंद्र ने निर्यात प्रोत्साहनों की घोषणा की है, लेकिन वैश्विक बाजारों में चने के दाम पहले ही कम होने से इन घोषणाओं का ज्यादा फायदा नहीं मिला। चुनाव नजदीक आ गए हैं, इसलिए चने के भारी उत्पादन की खरीदारी करना चुनौती है। इस चुनौती का सामना तीन भाजपा शासित राज्यों - मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान को आने वाले दिनों में करना होगा। इसमें थोड़ी सी चूक के बड़े राजनीतिक असर हो सकते हैं।

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