'वॉलमार्ट के प्रवेश से देसी ऑनलाइन किराना होगा मजबूत'

अर्णव दत्ता |  May 17, 2018 09:45 PM IST

बीएस बातचीत

नेस्ले इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुरेश नारायणन ने नेस्ले के अवसरों और चुनौतियों के बारे में विस्तार से बातचीत की। उन्होंने अर्णव दत्ता के साथ एक साक्षात्कार में कंपनी के लिए अवसरों और चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

कई वर्षों के बाद नेस्ले 2017 में अपनी सभी उत्पाद श्रेणियों में तेजी दर्ज करने में सफल रही। किन वजहों से यह सफलता मिली?

पिछले दो वर्षों में, हम उत्पाद विकास चक्र को दो वर्ष से घटाकर एक साल से भी कम पर लाने में सफल रहे हैं। हमने स्टॉक कीपिंग यूनिटïï्स (एसकेयू) की संख्या में 10-15 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। जहां शुरू में हमारे पास ऐसी अवधियां थी जब हमने कई उत्पाद लॉन्च किए और फिर इन्हें बंद कर दिया गया, वहीं अब हमारी रणनीति खासकर नए लॉन्च पर केंद्रित है। हमने वर्ष 2016 से लगभग 30 उत्पाद लॉन्च किए हैं और लगभग हमारी 20 प्रतिशत वृद्धि अब इन उत्पादों से आ रही है। इसके परिणामस्वरूप, समग्र वृद्धि आक्रामक बनी हुई है।

आपने स्टारबक्स सौदे का लाभ किस तरह उठाने की योजना बनाई है?

इस बारे में कुछ कहना फिलहाल जल्दबाजी है। इस सौदे पर काम अभी चल रहा है और काफी अस्पष्टïताओं को दूर किया जाना बाकी है। मौजूदा समय में मुख्य बाजार अमेरिका और चीन हैं। हमें सबसे पहले यह आकलन करना होगा कि इन बाजारों में सफलता कैसे पाई जा सकती है। हां, स्टारबक्स एक बड़ा नाम है और ग्राहक उससे जुड़े को इच्छुक हैं। 

कच्चे तेल की कीमतें चढ़ रही हैं, रुपया गिर रहा है, और एसएसपी में 50 प्रतिशत तक का इजाफा होने का अनुमान है। इसके अलावा सरकार द्वारा आम चुनाव से पहले ज्यादा खर्च किए जाने की भी संभावना है। ऐसे में वृहद-कारक व्यावसायिक परिदृश्य को किस तरह से प्रभावित करेंगे?

मैं सतर्कता के साथ आशान्वित हूं। बढ़ते खर्च से मदद मिलनी चाहिए। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और रुपये में गिरावट से हमें लागत का बेहतर प्रबंधन करने की जरूरत होगी। लेकिन मैं एमएसपी में किसी बड़ी तेजी के प्रभाव की गणना नहीं करना चाहता।

नेस्ले के फिर से मजबूत होने में एफएसएसएआई का क्या योगदान है?

एफएसएसएआई ने प्रत्येक उत्पाद श्रेणी के लिए जरूरी इंग्रिडिएंट की लिस्टिंग के साथ उत्पाद मंजूरी प्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में सक्रियता के साथ काम किया है। नियामकीय प्रक्रिया के सरलीकरण से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को फायदा हुआ है जिसमें नेस्ले भी शामिल है। एफएसएसएआई द्वारा किया गया कार्य सराहनीय है। 

भारतीय रिटेल परिदृश्य में वॉलमॉर्ट के प्रवेश से पैकेज्ड फूड सेक्टर और नेस्ले पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

मेरा मानना है कि इसका सकारात्मक असर दिखेगा और यह कुल ऑनलाइन किराना व्यवसाय के लिए अच्छा साबित हो सकता है। वॉलमार्ट बैकवार्ड लिंकेज विकसित करने में सक्षम है, जिसका भारत के फूड लॉजिस्टिक और रिटेलिंग स्पेस में अभाव रहा है। हालांकि पैकेज्ड फूड बिजनेस श्रेणी में ई-कॉमर्स का अपेक्षाकृत कम योगदान है, लेकिन हम छोटे शहरों में इसमें तेजी देख रहे हैं। नेस्ले के लिए प्लेटफॉर्म पर उपयुक्त प्रीमियम वाले उत्पाद पेश करने में अवसर मौजूद हैं।

जीएसटी के तहत कर लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दिए जाने की वजह से नेस्ले ट्रांजीशन रकम जमा करने को कहा गया है। जीएसटी-संबंधित अन्य ऐसी कौन सी समस्याएं हैं जिनका आपको अभी भी सामना करना पड़ रहा है?

इसे लेकर दो समस्याएं थीं। नवंबर की समय-सीमा के दौरान, हम कुछ स्टॉक बनाए हुए थे जिसके लिए क्रेडिट रिटर्न चुकाया गया था। लेकिन बाकी सब कुछ पुनव्र्यवस्था की वजह से था जिसमें नए पैकेजिंग मैटेरियल्स भी शामिल था जिसमें कुछ समय लगा। इस वजह से हम परिचालनगत विलंब के संदर्भ में एंटी-प्रोफिटियरिंग प्राधिकरण को स्पष्टï बताने के लिए आगे बढ़े थे। प्राधिकरण ने हमसे कंज्यूमर पुंड में ट्रांजीशन अमाउंट जमा कराने को कहा। इस रकम की अब गणना की जा रही है। 
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